India Gas Crisis: मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते भारत में गैस संकट गहराया, मुंबई और बेंगलुरु के रेस्टोरेंट्स में छोटा हुआ मेन्यू; होटलों को बड़ा नुकसान
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India Gas Crisis:  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के कारण भारत के कई बड़े शहरों में कमर्शियल गैस की कमी देखने को मिल रही है. खासकर मुंबई और बेंगलुरु में रेस्टोरेंट और होटल उद्योग पर इसका सीधा असर पड़ा है. गैस सिलेंडरों की सीमित उपलब्धता के कारण कई प्रतिष्ठानों ने अपने मेन्यू में कटौती कर दी है, जबकि कई छोटे होटल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं.

होटल संगठनों का कहना है कि गैस संकट के कारण कारोबार में भारी गिरावट आई है और संचालन लागत बढ़ने से उद्योग को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.  यह भी पढ़े:  Mumbai-Bengaluru Gas Crisis: मिडिल ईस्ट तनाव का असर, मुंबई और बेंगलुरु में गैस संकट गहरा, सैकड़ों होटलों में लगे ताले

मेन्यू से हटाए जा रहे ज्यादा गैस वाले व्यंजन

गैस की बचत के लिए कई होटल और रेस्टोरेंट ऐसे व्यंजन बनाना बंद कर रहे हैं जिनमें अधिक समय तक गैस की जरूरत होती है.

बेंगलुरु:


शहर के कई लोकप्रिय भोजनालयों ने अपने किचन संचालन को सीमित कर दिया है. कुछ जगहों पर डोसा, वड़ा और पूरी जैसे आइटम कम बनाए जा रहे हैं क्योंकि इन्हें बनाने के लिए लंबे समय तक तेल गर्म रखना पड़ता है. इससे मेन्यू छोटा हो गया है और ग्राहकों को सीमित विकल्प मिल रहे हैं.

मुंबई:


मुंबई के कई बिरयानी और पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले रेस्टोरेंट भी प्रभावित हुए हैं. बिरयानी, निहारी और अन्य धीमी आंच पर पकने वाले व्यंजन कई जगहों पर अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं. संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण इस तरह की कुकिंग करना मुश्किल हो गया है.

होटल उद्योग को हो रहा बड़ा आर्थिक नुकसान

गैस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट्स पर पड़ा है. होटल मालिकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें सीमित समय तक ही किचन चलाना पड़ रहा है.

इसका सीधा असर रोजाना की कमाई पर पड़ रहा है. कई जगहों पर ग्राहकों की संख्या भी घट गई है क्योंकि मेन्यू में कम विकल्प उपलब्ध हैं. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो हजारों होटल और रेस्टोरेंट्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

होटल संगठनों की चेतावनी

होटल और रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से गैस आपूर्ति सामान्य करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में कमर्शियल गैस की उपलब्धता नहीं बढ़ी तो कई छोटे प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है.

इसके अलावा बाहर खाने पर निर्भर रहने वाले छात्रों, कामकाजी लोगों और डिलीवरी सेवाओं पर भी इसका असर पड़ रहा है.

कालाबाजारी और बढ़ती लागत

गैस की कमी के बीच बाजार में सिलेंडरों की कीमत भी बढ़ती दिखाई दे रही है. कुछ जगहों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत आधिकारिक दर से अधिक पर बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं.

छोटे रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि ऊंची कीमत पर गैस खरीदने के बावजूद वे भोजन की कीमत तुरंत नहीं बढ़ा सकते, जिससे उन्हें घाटे का सामना करना पड़ रहा है.

सरकार की प्राथमिकता और वैकल्पिक उपाय

वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और अस्पतालों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है. इसी कारण कमर्शियल गैस की उपलब्धता सीमित हो गई है.

कुछ बड़े रेस्टोरेंट बिजली आधारित कुकिंग सिस्टम जैसे इंडक्शन कुकिंग का इस्तेमाल शुरू कर रहे हैं, लेकिन पारंपरिक भारतीय और चाइनीज व्यंजनों के लिए यह विकल्प पूरी तरह कारगर नहीं माना जा रहा.

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर देश के बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर लंबे समय तक पड़ सकता है.