दीपावली पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और हैंडीक्राफ्ट जैसे उत्पादों की बिक्री बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत: अर्थशास्त्री

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर : भारत में दीपावली पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट और सजावट के सामान की बिक्री में जोरदार उछाल देखा गया है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है. यह बयान अर्थशास्त्रियों की ओर से बुधवार को दिया गया. इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा कि भारतीय उत्पादों में खासकर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट और सजावट के सामान की मांग में बहुत अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. यह ग्राहकों के बदले हुए आशावादी रुख को दिखाता है. इससे घरेलू उत्पादों को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा मिला है.

उन्होंने आगे कहा, "हमारा शुरू से ही मानना था कि दीपावली सीजन में जीएसटी सुधार और इनकम टैक्स में राहत के चलते अर्थव्यवस्था पर एक अनुकूल असर होगा. इस बार करीब 5.40 लाख करोड़ रुपए की वस्तुओं का व्यापार हुआ है. कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में 25-30 प्रतिशत, ऑटो सेक्टर की बिक्री में भी इतनी ही बढ़ोतरी देखी गई थी." एक अन्य अर्थशास्त्री परमबीर कुमार सरकार ने कहा कि सितंबर में जीएसटी सुधार होने के कारण एफएमसीजी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर उत्पादों आदि की कीमत में कमी आई है. इस कारण हमें अंदाजा था कि अक्टूबर में बिक्री में काफी उछाल आएगा. नवरात्रि से लेकर दीपावली तक का जो डेटा आया है वह काफी अच्छा है. यह भी पढ़ें : MP के ग्वालियर में आवारा कुत्तों का आतंक, बुजुर्ग महिला का पूरा पैर नोंच-नोंच कर खाया, गंभीर रूप से घायल

अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के अनुसार, नवरात्री से लेकर दीपावली तक चलने वाले फेस्टिव सीजन में गुड्स की बिक्री रिकॉर्ड 5.40 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है. इस दौरान करीब 65,000 करोड़ रुपए की सर्विसेज भी ग्राहकों की ओर से खरीदी गई हैं. यह पिछले साल नवरात्रि से दीपावली की अवधि में हुई 4.25 लाख करोड़ रुपए की फेस्टिव सेल्स की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है. सर्वेक्षण में बताया गया कि इसमें रिटेल की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत रही है. ऑफलाइन मार्केट में भी मांग अच्छी रही है.

कन्फेक्शनरी, होम डेकोर, जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसी प्रमुख उपभोक्ता और खुदरा श्रेणियों में जीएसटी दरों में कमी से मूल्य प्रतिस्पर्धा में काफी सुधार हुआ, जिससे खरीदारी में इजाफा हुआ है.