श्रीकाकुलम के वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में कैसे मची भगदड़? हादसे के कई कारण; पीड़ितों ने बताई आपबीती
एकादशी के पवित्र अवसर पर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (Venkateswara Swamy Temple) में शनिवार की सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. लेकिन भक्ति का यह उत्सव कुछ ही पलों में भयावह हादसे में बदल गया.
Andhra Temple Stampede: एकादशी के पवित्र अवसर पर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (Venkateswara Swamy Temple) में शनिवार की सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. लेकिन भक्ति का यह उत्सव कुछ ही पलों में भयावह हादसे में बदल गया. मंदिर परिसर में मची भगदड़ में 8 महिलाओं और 1 बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए.
हादसे में बचे लोगों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि किसी को निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा था. भीड़ में लोगों का दम घुटने लगा, जिसमें सबसे पहले बच्चे और महिलाएं गिरीं. वहां मौजूद लोगों को दिशा तक समझ नहीं आ रही थी और आवाज लगाने पर भी कोई मदद नहीं कर पा रहा था. कई गवाहों का कहना है कि अगर एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था.
कैसे हुई यह भगदड़? एक संकरे गेट ने बढ़ाया खतरा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा गेट था. अंदर और बाहर निकलने वालों की भीड़ का टकराव हो रहा था. जब गेट अचानक खोला गया, तो बाहर निकल रही भीड़ और अंदर जाने की कोशिश कर रहे लोग आपस में भीड़ गए. कमजोर स्टील की रेलिंग टूट गई, लोग करीब 6 फीट ऊंचाई से नीचे गिर पड़े और एक-दूसरे पर चढ़ते चले गए. सांस न ले पाने और चोट लगने से कई भक्त वहीं गिरते चले गए.
भीड़ नियंत्रण में विफलता
आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री वंगलापुड़ी अनीता के अनुसार, मंदिर में हर शनिवार 1500–2000 लोग आते हैं, लेकिन इस बार कार्तिक मास की एकादशी और शनिवार की वजह से संख्या कई गुना ज्यादा हो गई.
प्रशासन की लापरवाही
मंदिर का एक हिस्सा अभी निर्माणाधीन था और मंदिर प्रशासन द्वारा किसी भी सरकारी अनुमति का पालन नहीं किया गया. इसी कारण मंदिर प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. पुलिस के मुताबिक यह मंदिर निजी स्वामित्व में संचालित होता है और आयोजकों ने सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी प्रशासन को बिल्कुल नहीं दी. ज़िम्मेदार अधिकारी मुकुंदा पांडा बिना अनुमति ही मंदिर का संचालन कर रहे थे. जिला प्रशासन का कहना है कि हर धार्मिक संगठन को किसी भी आयोजन से पहले सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की अनुमति अनिवार्य रूप से लेनी होती है, लेकिन यहां यह नियम पूरी तरह नजरअंदाज किया गया.