Hangal Gang Rape Case: कर्नाटक पुलिस ने 19 के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया
rape(Photo Credit: Rep/pixabay)

हावेरी (कर्नाटक), 8 मार्च : कर्नाटक पुलिस ने हंगल सामूहिक बलात्कार मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपपत्र दाखिल कर दिया है. हावेरी जिले में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, जिसके बाद अब पुलिस ने यह कार्रवाई की है.

सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि पुलिस ने हंगल जेएमएफसी कोर्ट में 873 पेजों का आरोपपत्र दाखिल किया है. सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने अब तक इस मामले में 19 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें से 7 वो हैं जो दुष्कर्म में कथित तौर पर संलिप्त थे. मोरल पुलिसिंग की शिकार पीड़िता ने 11 जनवरी को एक वीडियो जारी किया था जिसमें उसने कहा था कि कर्नाटक के हावेरी जिले में गुंडों ने उसके साथ बार-बार बलात्कार किया. यह भी पढ़ें : Maharashtra Shocker: नासिक में सीवेज टैंक में फेंके जाने से 4 साल के बच्चे की मौत, परेशान करने वाला वीडियो आया सामने

अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पीड़िता का कहना है कि जब वह होटल में थी, तब 5 से 6 लोगों का गिरोह जबरन अंदर घुसा और इसके बाद उससे सवाल-जवाब किए. इसके बाद उसे जबरन अपनी बाइक से किसी सुनसान जगह में ले गए और उसके साथ मारपीट की. उसके साथ सभी ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया. इसके बाद उन लोगों ने पीड़िता को कार में बैठाया. इसके बाद ड्राइवर ने भी उसके साथ रेप किया. इसके बाद भी उसकी मुसीबत खत्म नहीं हुई. इसके बाद उसे दो-तीन जगहों पर ले जाया गया. वहां पर भी उसके साथ रेप किया गया. इसके बाद आरोपी उसे नेशनल हाईवे के पास ले गए, जहां से उसने अपनी बस पकड़ ली.

पीड़िता ने पुलिस को कहा, "मैं चाहती हूं कि सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले." वहीं, पीड़िता के पति ने मीडिया के सामने आकर कहा कि मनचलों ने मिलकर मेरी पत्नी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. पति ने मीडिया के सामने कहा, "मेरी पत्नी का अपहरण कर उस पर अमानवीय तरीके से हमला किया गया. उसने इस नृशंसता का खुलासा अपने परिवार के सदस्यों के साथ किया है."

वहीं, बीजेपी का आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मामले को दबाने का प्रयास किया, लेकिन बीजेपी द्वारा लगातार इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर हमला किया गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार दबाव में आ गई. कर्नाटक की बीजेपी इकाई ने इस पूरे मसले को लेकर नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि मामले को एसआईटी को सौंपा जाए.