New GST Rates: त्योहारों का मौसम आने वाला है और सरकार आम आदमी को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है. ख़बरों के मुताबिक, केंद्र सरकार नवरात्रि तक GST की नई दरें लागू कर सकती है, जिससे कई चीजें सस्ती हो सकती हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आज GST काउंसिल की बैठक हुई, जिसमें टैक्स सिस्टम को आसान बनाने पर चर्चा की गई.
आखिर क्यों बदल रहा है GST सिस्टम?
सरकार GST सिस्टम में यह बड़ा बदलाव इसलिए कर रही है क्योंकि पिछले 8 सालों के आंकड़ों से एक बहुत दिलचस्प बात सामने आई है.
- अभी GST के चार स्लैब हैं - 5%, 12%, 18% और 28%.
- सरकार की कुल GST कमाई का लगभग 67% हिस्सा अकेले 18% वाले स्लैब से आता है.
- वहीं, 12% वाले स्लैब से सबसे कम, सिर्फ 5% की कमाई होती है.
- 5% वाले स्लैब से 7% और 28% वाले स्लैब से 11% की कमाई होती है.
इन आंकड़ों को देखकर मंत्रियों के एक समूह (Group of Ministers) ने सुझाव दिया है कि टैक्स सिस्टम को आसान बनाया जाए.
क्या है नया प्लान?
सरकार का प्लान है कि 4 टैक्स स्लैब की जगह अब सिर्फ 2 स्लैब रखे जाएं.
- 12% और 28% स्लैब को खत्म करना: सरकार 12% वाले स्लैब को इसलिए हटाना चाहती है क्योंकि इससे बहुत कम टैक्स आता है. वहीं, 28% वाले स्लैब को हटाने का मकसद लग्जरी और महंगी चीजों के दाम कम करना है. माना जा रहा है कि 28% टैक्स की वजह से लोग कार, फ्रिज, टीवी जैसी चीजें खरीदने से कतराते हैं.
- सिर्फ 5% और 18% स्लैब रहेंगे: अगर यह बदलाव होता है तो देश में GST के मुख्य रूप से सिर्फ दो स्लैब - 5% और 18% - रह जाएंगे. ज्यादातर चीजें इन्हीं दो स्लैब में आ जाएंगी.
#NewsAlert | New GST rates to be implemented by Navratri, says report#GSThttps://t.co/ajAPZIMI7x pic.twitter.com/jIciodzn7B
— Moneycontrol (@moneycontrolcom) September 3, 2025
आम आदमी को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को होगा.
- सस्ती होंगी कई चीजें: जो चीजें अभी 28% टैक्स स्लैब में आती हैं, जैसे कि कार, मोटरसाइकिल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (टीवी, फ्रिज, एसी) और सीमेंट-पेंट जैसी चीजें, वे 18% वाले स्लैब में आ सकती हैं. इससे इनकी कीमतें काफी कम हो जाएंगी.
- बचत और खरीदारी बढ़ेगी: जब चीजें सस्ती होंगी, तो लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे. इससे मध्यमवर्गीय परिवारों की बचत भी बढ़ेगी.
- नई नौकरियां मिल सकती हैं: जब चीजों की मांग बढ़ेगी तो उन्हें बनाने वाली कंपनियों को ज्यादा लोगों को काम पर रखना पड़ेगा. इससे ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर में नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'दिवाली का शुरुआती तोहफा' कहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी कहना है कि इससे छोटे कारोबारियों को कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी और उन्हें व्यापार करने में आसानी होगी.
क्या इसमें कोई अड़चन है?
हां, इस बदलाव को लागू करना इतना आसान नहीं है. GST काउंसिल की बैठक में इस पर सभी राज्यों की सहमति बनानी होगी. कई गैर-बीजेपी शासित राज्य, जैसे तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल, इसका विरोध कर सकते हैं. उन्हें डर है कि टैक्स स्लैब कम होने से उनके राज्य की कमाई घट सकती है. वे इसकी भरपाई के लिए सिगरेट, तंबाकू जैसे 'सिन गुड्स' पर टैक्स बढ़ाने का सुझाव दे सकते हैं.
सरकार का मानना है कि भले ही शुरुआत में टैक्स कलेक्शन थोड़ा कम हो, लेकिन जब लोग सस्ती चीजें ज्यादा खरीदेंगे तो कुल मिलाकर कमाई बढ़ जाएगी. यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में आर्थिक चुनौतियां हैं, इसलिए सरकार घरेलू मांग को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है. अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो इस नवरात्रि आपके लिए खरीदारी करना पहले से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.













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