BC Khanduri Dies: नहीं रहें उत्तराखंड के पूर्व CM बीसी खंडूरी, निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और PM मोदी ने जताया गहरा शोक
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गहरा शोक व्यक्त किया है.
BC Khanduri Dies: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार, 19 मई 2026 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. उन्होंने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्र और विशेष रूप से उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है.
राष्ट्रपति ने व्यक्त किया गहरा शोक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है. उन्होंने भारतीय सेना में अनुकरणीय सेवा देने के बाद सार्वजनिक जीवन में ईमानदार, सरल, पारदर्शी और विकासोन्मुखी राजनीति का एक बड़ा उदाहरण पेश किया. देश और उत्तराखंड के विकास, सुशासन व जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा याद रखी जाएगी. यह भी पढ़े: Daya Ben’s Father Bhim Vakani Dies: नहीं रहें ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ फेम दया बेन के पिता भीम वकानी, अहमदाबाद में निधन
PM मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूडी (सेवानिवृत्त) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा. उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा. केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है. देशभर में कनेक्टिविटी की बेहतरी के लिए उन्होंने निरंतर अथक प्रयास किए. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और समर्थकों के साथ हैं. ओम शांति.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शोक जताते हुए कहा कि सेना में तीन दशकों से अधिक समय तक सेवा देने वाले खंडूरी जी जीवनभर 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के प्रति समर्पित रहे. मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.
सैन्य जीवन से राजनीति तक का शानदार सफर
भुवन चंद्र खंडूरी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था. राजनीति में आने से पहले वे भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी थे. उन्होंने 1954 से 1990 तक कुल 36 वर्षों तक भारतीय सेना के 'कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स' में अपनी सेवाएं दीं. इस दौरान उन्होंने रेजिमेंटल कमांडर के रूप में काम किया, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया और सेना में मुख्य अभियंता (Chief Engineer) व सेना मुख्यालय में अतिरिक्त सैन्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों को संभाला. वर्ष 1982 में उनकी असाधारण सेवाओं के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें 'अति विशिष्ट सेवा पदक' (AVSM) से सम्मानित किया गया था.
राजनीतिक जीवन और प्रशासनिक सुधार
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान भाजपा में शामिल हुए. वे पहली बार 1991 में गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. इसके बाद वे 1998, 1999 और 2004 में भी इसी सीट से लोकसभा पहुंचे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान उन्होंने 2000 से 2003 तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में देश में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किए. इसके बाद 2003 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया.
वर्ष 2007 में उन्होंने संसदीय राजनीति से राज्य की राजनीति का रुख किया. उनके नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की और 8 मार्च 2007 को उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. वे दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे (पहला कार्यकाल 2007 से 2009 और दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक). अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहद कड़े कदम उठाए और राज्य में एक पारदर्शी, अनुशासित और जवाबदेह प्रशासन की नींव रखी. उनकी सादगी, ईमानदारी और कड़क अनुशासन उनकी राजनीतिक पहचान के मुख्य स्तंभ रहे.