'विदेशी नीति या एकतरफा सरेंडर?': भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे का पीएम मोदी पर बड़ा हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है. उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना 'जल्दबाजी' में की गई इस डील को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करार दिया.
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने शनिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए भारत-अमेरिका (India-US) के बीच हुए हालिया अंतरिम व्यापार समझौते (Trade Deal) को 'एकतरफा सरेंडर' करार दिया. खरगे ने सवाल उठाया कि जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ (Tariffs) को लेकर सुनवाई चल रही थी, तो भारत सरकार ने फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया और 'जल्दबाजी' में इस समझौते पर हस्ताक्षर क्यों किए? यह भी पढ़ें: 'हम सभी एक ही पेज पर हैं’: कांग्रेस छोड़ने की अटकलों के बीच राहुल गांधी और खरगे से मिले शशि थरूर, कहा- 'सब ठीक है'
'ट्रैप डील' और रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में खरगे ने इस समझौते को भारत के लिए एक 'जाल' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर भारत के राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ समझौता किया है.
खरगे ने पोस्ट में लिखा:
'क्या यह दिशाहीन विदेशी नीति है या एकतरफा सरेंडर? मोदी सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया और एक ऐसी 'ट्रैप डील' में क्यों फंस गई, जिसने भारत से भारी रियायतें छीन लीं?'
समझौते की शर्तों पर कांग्रेस के गंभीर आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने साझा बयान (Joint Statement) के हवाले से कई चिंताजनक बिंदुओं को रेखांकित किया:
- कृषि क्षेत्र को खतरा: कई अमेरिकी निर्यातों पर शून्य टैरिफ लगाकर भारतीय कृषि क्षेत्र को अमेरिकी सामानों के लिए खोल दिया गया है.
- भारी आयात योजना: अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान आयात करने की योजना बनाई गई है.
- ऊर्जा सुरक्षा: रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई गई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.
- डिजिटल रियायतें: डिजिटल मोर्चे पर अमेरिका को कई तरह की कर (Tax) रियायतें दी गई हैं.
'मोदी जी सच बताएं, आप पर किसका दबाव था?'
प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगते हुए खरगे ने पूछा कि क्या 'एपस्टीन फाइल्स' (Epstein Files) जैसा कोई दबाव था जिसके कारण भारत के हितों से समझौता किया गया? उन्होंने मांग की कि सरकार को 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए और एक ऐसा निष्पक्ष व्यापार समझौता करना चाहिए जिससे हमारे किसानों, श्रमिकों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा हो सके. यह भी पढ़ें: Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026: छत्रपति शिवाजी महाराज को पीएम मोदी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने दी श्रद्धांजलि, शौर्य और सुशासन के प्रतीक को देश ने किया नमन
खड़गे ने मोदी सरकार की अमेरिका नीति पर सवाल उठाए
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लगाने के लिए अपनी कानूनी शक्तियों (IEEPA 1977) का उल्लंघन किया था. कोर्ट ने कहा कि शुल्क लगाने की शक्ति संसद (Congress) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं.
इस फैसले को ट्रंप ने 'भयानक निर्णय' बताया और तुरंत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के लिए एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार द्वारा इस फैसले से ठीक पहले की गई डील ने भारत को मिलने वाले संभावित कानूनी लाभ से वंचित कर दिया है.