Delhi Traffic Challan: 10 जनवरी को राष्ट्रीय लोक अदालत, ट्रैफिक चालान माफ करवाने का सुनहरा मौका, ऐसे पाएं ऑनलाइन टोकन

दिल्ली में पेंडिंग ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए 10 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर टोकन रजिस्ट्रेशन आज से शुरू हो गया है. जानें चालान माफी की पूरी प्रक्रिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: दिल्ली के वाहन स्वामियों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (Delhi State Legal Services Authority) यानी डीएसएलएसए (DSLSA) ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (Delhi Traffic Police) के सहयोग से साल 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) की घोषणा कर दी है. यह अदालत शनिवार, 10 जनवरी को आयोजित की जाएगी. इस सत्र का मुख्य उद्देश्य राजधानी में लंबित लाखों ई-चालानों और नोटिसों का तेजी से निपटारा करना है. अधिकारियों के मुताबिक, इस बार लगभग 1.80 लाख चालानों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें जुर्माने में भारी छूट या पूर्ण माफी मिलने की संभावना है.

यह लोक अदालत दिल्ली के सभी सात जिला न्यायालय परिसरों में लगेगी, जिनमें तीस हजारी, पटियाला हाउस, कड़कड़डूमा, रोहिणी, द्वारका, साकेट और राउज एवेन्यू शामिल हैं. यह भी पढ़ें: Delhi Traffic Advisory On New Year: नए साल के जश्न को लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी जारी, 31 दिसंबर को बाहर जाने से पहले जान लें ये नियम

अनिवार्य ऑनलाइन टोकन सिस्टम

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने एक सख्त डिजिटल टोकन प्रणाली लागू की है. टोकन डाउनलोड करने की प्रक्रिया आज, 5 जनवरी सुबह 10:00 बजे से दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू हो गई है.

दिल्ली में 10 जनवरी को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा 

किन चालानों का होगा निपटारा?

लोक अदालत में केवल उन्हीं ट्रैफिक उल्लंघनों का निपटारा होगा जो 'शमनीय' (Compoundable) श्रेणी में आते हैं और जो 30 नवंबर 2025 तक जारी किए गए हैं.

निपटारे की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज

10 जनवरी को सुबह 10:00 बजे से न्यायिक अधिकारियों की बेंच मामलों की समीक्षा शुरू करेगी.

जरूरी दस्तावेज: प्रतिभागियों को अपने टोकन की प्रिंटेड कॉपी, वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), ड्राइविंग लाइसेंस और एक सरकारी आईडी प्रूफ साथ लाना होगा.

अंतिम फैसला: लोक अदालत का निर्णय सिविल कोर्ट की डिक्री के समान होता है और यह अंतिम होता है. एक बार समझौता हो जाने के बाद, इसके खिलाफ किसी भी अदालत में अपील नहीं की जा सकती.

बहरहाल, साकेट और तीस हजारी जैसे व्यस्त कोर्ट परिसरों के स्लॉट कुछ ही घंटों में भर जाते हैं, इसलिए वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना टोकन डाउनलोड कर लें.  यदि आप इस बार स्लॉट पाने में असमर्थ रहते हैं, तो अगली राष्ट्रीय लोक अदालत अस्थायी रूप से 14 मार्च 2026 को प्रस्तावित है.

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