Delhi Riots Case: उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की 'बड़ी साजिश' से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है. हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है.
Delhi Riots Case: दिल्ली दंगों (Delhi Riots) की 'बड़ी साजिश' (Larger Conspiracy Case) के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार, 5 जनवरी को बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने इस मामले में जेल में बंद अन्य पांच आरोपियों को जमानत देकर बड़ी राहत दी है. यह भी पढ़ें: Attack On CM Rekha Gupta: आप' ने दिल्ली सीएम पर हुए हमले की निंदा की, अरविंद केजरीवाल ने कहा- लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं
किन शर्तों पर टली जमानत?
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल जेल में ही रखने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दोनों आरोपी अपनी जमानत के लिए दोबारा आवेदन तभी कर सकते हैं जब मामले के 'संरक्षित गवाहों' (Protected Witnesses) का परीक्षण पूरा हो जाए, या फिर आज के फैसले से एक साल का समय बीत जाए. अदालत का मानना है कि इस स्तर पर जमानत देने से मामले की जांच और गवाहों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.
इन 5 आरोपियों को मिली जमानत
जहाँ एक तरफ खालिद और इमाम को राहत नहीं मिली, वहीं कोर्ट ने इसी साजिश मामले में नामजद पांच अन्य लोगों को जमानत दे दी है. इनमें शामिल हैं- गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान, शादाब अहमद. इन पांचों आरोपियों ने लंबे समय से जेल में रहने और सुनवाई में देरी का हवाला देते हुए जमानत की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
उमर खालिद, शरजील इमाम को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया
क्या है 'बड़ी साजिश' का मामला?
यह पूरा मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ा है. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि ये दंगे अचानक नहीं हुए थे, बल्कि संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के नाम पर एक पूर्व नियोजित साजिश के तहत भड़काए गए थे.
इन दंगों में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य कार्यकर्ताओं पर UAPA के तहत आरोप तय किए थे.
आगे की कानूनी राह
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उमर खालिद और शरजील इमाम को कम से कम एक साल या गवाहों के बयान दर्ज होने तक जेल में ही रहना होगा. कानून के जानकारों का कहना है कि UAPA के मामलों में 'प्रथम दृष्टया' (Prima Facie) केस पाए जाने पर जमानत मिलना काफी कठिन हो जाता है. अब नजरें निचली अदालत में होने वाली गवाहों की गवाही पर टिकी हैं.