दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से मिला बेहिसाब कैश, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने लिया सख्त एक्शन

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का फैसला किया. मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व में कॉलेजियम ने इस मामले को गंभीरता से लिया, लेकिन कुछ सदस्यों ने सख्त कार्रवाई की भी मांग की.

सुप्रीम कोर्ट (Photo: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के न्यायाधीश यशवंत वर्मा (Yashwant Verma) को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है. उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से वापस इलाहाबाद भेजा जाएगा. सूत्रों के अनुसार, यह फैसला तब लिया गया जब होली की छुट्टियों के दौरान उनके आधिकारिक बंगले से बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी बरामद हुई.

कैसे हुआ खुलासा?

हाईकोर्ट के न्यायाधीश के सरकारी आवास में आग लगने के बाद परिवार के सदस्यों ने आपातकालीन सेवाओं को बुलाया. जब दमकल विभाग मौके पर पहुंचा, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी. इस दौरान घर में बड़ी मात्रा में नकदी पाई गई. घटना के समय जस्टिस वर्मा शहर में मौजूद नहीं थे.

कॉलेजियम की सख्त कार्रवाई

जब इस मामले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तक पहुंची, तो मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व में कॉलेजियम ने न्यायाधीश वर्मा के स्थानांतरण का फैसला किया. हालांकि, जस्टिस वर्मा ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

सूत्रों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना को गंभीरता से लिया और कॉलेजियम के सभी पांच सदस्य इस स्थानांतरण पर सहमत हो गए. हालांकि, कुछ सदस्यों ने यह भी माना कि न्यायपालिका की साख बनाए रखने के लिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

क्या हो सकता है अगला कदम?

कुछ सदस्यों ने जस्टिस वर्मा से इस्तीफा मांगने का भी सुझाव दिया. यदि वे इस्तीफा देने से इनकार करते हैं, तो मुख्य न्यायाधीश द्वारा उनके खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की जा सकती है. यदि जांच में उन पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो संसद द्वारा उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

हाईकोर्ट के जज को कैसे हटाया जा सकता है?

1999 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों से निपटने के लिए दिशानिर्देश तय किए थे.

इन दिशानिर्देशों के अनुसार

यदि न्यायाधीश इस्तीफा देने से इनकार करते हैं, तो मुख्य न्यायाधीश सरकार को पत्र लिखकर अनुच्छेद 124(4) के तहत संसद में उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कह सकते हैं.

यह मामला न्यायपालिका की निष्पक्षता और साख पर सवाल खड़े कर सकता है, इसलिए इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.

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