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Manipur CM Biren Singh: मणिपुर में मेइती के बहुमत के कारण सीएम बीरेन सिंह की कुर्सी सुरक्षित

मणिपुर में 80 दिनों से अधिक समय तक चली मेइती-कुकी जातीय हिंसा, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, के अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में फैलने के खतरे के बीच मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह अपने इस्तीफे की व्यापक मांग के बावजूद पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं

Manipur CM Biren Singh: मणिपुर में मेइती के बहुमत के कारण सीएम बीरेन सिंह की कुर्सी सुरक्षित
(Photo Credits Instagram)

इम्‍फाल, 23 जुलाई: मणिपुर में 80 दिनों से अधिक समय तक चली मेइती-कुकी जातीय हिंसा, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, के अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में फैलने के खतरे के बीच मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह अपने इस्तीफे की व्यापक मांग के बावजूद पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं कांग्रेस और कई कुकी-ज़ो आदिवासी संगठनों सहित कई विपक्षी दल पूर्वोत्तर राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं. यह भी पढ़े: Manipur CM Not Resigning: CM बीरेन सिंह नहीं छोड़ेंगे मुख्यमंत्री पद, फटे हुए इस्तीफे पत्र की फोटो वायरल

सिंह के इस्तीफे की संभावना के बारे में पूछे जाने पर, केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक, जो पिछले साल के मणिपुर विधानसभा चुनावों के दौरान केंद्रीय पर्यवेक्षकों में से एक थीं, ने कहा कि उन्हें इस्तीफा क्यों देना चाहिए मणिपुर में हिंसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन पश्चिम बंगाल में हिंसा ने भी तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य में लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया भौमिक ने आईएएनएस को बताया, ''बंगाल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा ने सभी हदें पार कर दीं तृणमूल कांग्रेस निर्दोष लोगों की जीवन और संपत्तियों की रक्षा करने में विफल रही.

जब मीडियाकर्मियों ने उनके इस्तीफे के बारे में पूछा, तो बीरेन सिंह ने कहा, “मैं इस तरह से नहीं सोच रहा हूं मेरी प्राथमिकता राज्य में शांति लाना और सामान्य स्थिति बहाल करना है हर समाज में उपद्रवी होते हैं लेकिन मैं उन्हें नहीं छोड़ूंगा और अंततः उन्हें उचित सजा मिलेगी राजनीतिक टिप्पणीकार राजकुमार सत्यजीत सिंह ने कहा कि हालांकि सिंह के शीर्ष पद पर बने रहने से भाजपा की छवि और विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है, लेकिन मणिपुर में भाजपा सरकार का नेतृत्व करने के लिए सिंह से बेहतर कोई विकल्‍प नहीं है.

सत्यजीत सिंह ने आईएएनएस को बताया, “सिंह मेइती समुदाय से हैं, जो मणिपुर की चुनावी राजनीति पर हावी है मेइती समुदाय के बीच उनकी लोकप्रियता लगभग निर्विवाद है उनके नेतृत्व में भाजपा पिछले साल फरवरी-मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में मणिपुर में पूर्ण बहुमत के साथ दूसरे कार्यकाल के लिए सत्ता में लौटी उन्होंने कहा कि अगर सिंह ने इस्तीफा दिया तो भाजपा के लिए नई राजनीतिक समस्याएं पैदा होने की आशंका है.

मणिपुर की लगभग 30 लाख आबादी में मेइती लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर घाटी क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि जनजातीय नागा और कुकी आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं एक फुटबॉलर, बीरेन सिंह ने 2002 में राजनीति में आने से पहले कुछ समय के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में काम किया था और फरवरी 2012 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री थे 62 वर्षीय नेता ने 2016 में कांग्रेस छोड़ दी और 2017 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

मणिपुर में इस साल 3 मई को गैर आदिवासी मेइती और आदिवासी कुकी के बीच जातीय हिंसा शुरू होने से पहले, 13 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच चार भाजपा विधायकों - थोकचोम राधेशम, करम श्याम, रघुमणि सिंह और पौनम ब्रोजेन सिंह - ने सीएम के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार छोड़ दी.

चारों भाजपा विधायक क्रमशः मुख्यमंत्री के सलाहकार और मणिपुर राज्य पर्यटन विकास निगम, मणिपुर नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी और मणिपुर विकास सोसायटी के अध्यक्ष थे चारों विधायकों ने दावा किया कि उन्हें अपने पद पर काम करने के लिए उचित जिम्मेदारी, धन और अधिकार नहीं दिए गए हालांकि, बीरेन सिंह ने दावा किया कि विधायकों के बीच कोई मतभेद या नाराजगी नहीं है इस मुद्दे पर 27 अप्रैल को इम्‍फाल में एक "अनिर्णायक" पार्टी बैठक में चर्चा की गई थी बैठक में भाजपा के पूर्वोत्तर समन्वयक और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ए. शारदा देवी उपस्थित थे.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में 3 मई को पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के बाद भड़की जातीय हिंसा ने अब तक 160 से अधिक लोगों की जान ले ली है विभिन्न समुदायों के 600 से अधिक लोग घायल हो गए हैं और 70,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं साथ ही बड़ी संख्या में संपत्तियों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है, जिससे मणिपुर में सत्तारूढ़ भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ने की आशंका है जातीय हिंसा के बीच भाजपा नेताओं और विधायकों का एक वर्ग बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग कर रहा है.

हालांकि, मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं और विधायकों ने दावा किया कि नशीली दवाओं के खतरे, म्यांमार से दवाओं के अवैध व्यापार, पोस्त की खेती और सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के उनके (बीरेन सिंह) प्रयासों से बेईमान लोग नाराज हैं और वे उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं 30 जून को, दिन भर की अटकलों और भारी नाटक के बाद, बीरेन सिंह ने कहा कि वह इस "महत्वपूर्ण मोड़" पर इस्तीफा नहीं देंगे.

बीरेन सिंह, कई मंत्रियों और नेताओं के साथ, 30 जून की दोपहर अपने आधिकारिक बंगले से बाहर आए, लेकिन जब उनके काफिले ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से मिलने के लिए राजभवन की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो हजारों लोगों, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं, ने उनकी कार को घेर लिया और उन्हें अपने आवास पर लौटने के लिए मजबूर किया.

बाद में उन्होंने ट्वीट किया, "इस महत्वपूर्ण मोड़ पर, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दूंगा कुछ मीडिया ने राज्यपाल को संबोधित सिंह का कथित त्याग पत्र भी दिखाया मणिपुर के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सपम रंजन सिंह ने कहा कि भारी भीड़ ने मुख्यमंत्री को राजभवन जाने से रोक.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2023 01:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).