भारत में क्रॉनिक बीमारियों से मौतों में हुई बढ़ोतरी, जबकि दुनिया में आई गिरावट; स्टडी में बड़ा खुलासा
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भारत में गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) जैसे हृदय रोग, कैंसर, और क्रॉनिक रेस्पिरेटरी बीमारियों से मरने का खतरा बीते दशक (2010-2019) में बढ़ा है. द लांसेट (The Lancet) में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है. इंपीरियल कॉलेज लंदन (London's Imperial College) के प्रोफेसर माजिद एज़्ज़ाती (Majid Ezzati) के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के मुताबिक, 2010 से 2019 के बीच महिलाओं में NCD से मरने की संभावना 2.1% और पुरुषों में 0.1% बढ़ी.

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इस स्टडी के मुताबिक 40 साल से अधिक उम्र की महिलाएं और 55 साल से अधिक उम्र के पुरुष सबसे अधिक खतरे में हैं. महिलाओं के लिए यह संभावना 2001 में 46.7% थी, जो 2011 में 46.6% पर थोड़ी घटी थी, लेकिन 2019 में यह बढ़कर 48.7% हो गई.

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किन बीमारियों से ज्यादा मौतें हो रहीं?

अध्ययन ने बताया कि इस अवधि में जिन बीमारियों ने मौतों में ज्यादा योगदान दिया, उनमें इस्कीमिक हृदय रोग (Ischemic Heart Disease), डायबिटीज और उससे जुड़ी किडनी की समस्याएं शामिल हैं. वहीं, लिवर सिरोसिस, स्टमक कैंसर, सीओपीडी (COPD), और स्ट्रोक जैसे मामलों में पुरुषों के लिए कुछ सुधार देखने को मिला.

फेफड़ों के कैंसर के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी

भारत उन केवल पांच देशों में शामिल है जहां फेफड़ों के कैंसर से मरने के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस लिस्ट में अन्य चार देश आर्मेनिया, ईरान, मिस्र, और पापुआ न्यू गिनी हैं.

दुनिया में गिरावट, भारत में क्यों बढ़ोतरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां, धूम्रपान, प्रदूषण, तनाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक कम पहुंच जैसे कारण हो सकते हैं. दुनिया के अधिकांश देशों में एनसीडी से मौतों में गिरावट आई है. महिलाओं के लिए 152 और पुरुषों के लिए 147 देशों में सुधार दर्ज हुआ है. जबकि भारत में स्थिति उलटी दिशा में गई है.

अध्ययनकर्ताओं ने डेटा की गुणवत्ता को "बहुत कम" बताया है, जिससे ये निष्कर्ष अनिश्चितता के दायरे में हैं. फिर भी, यह संकेत है कि भारत को NCDs के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत करना होगा.

क्या हो सकता है समाधान?

स्वस्थ जीवनशैली अपनाना: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और धूम्रपान से परहेज.

नियमित स्वास्थ्य जांच: समय-समय पर स्वास्थय जांच जरूरी है, जिसे शुरुआती चरण में बीमारियों का पता लगाया जा सके.

सरकार को भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो भारत में क्रॉनिक बीमारियों से होने वाली मौतों को आने वाले वर्षों में काफी हद तक कम किया जा सकता है.