महाराष्ट्र से सुप्रिया सुले, श्रीकांत शिंदे और प्रफुल्ल पटेल को बड़ी जिम्मेदारी, 60 देशों के दौरे पर जाने वाले सांसदों के पार्लियामेंट्री फ्रेंड्स ग्रुप में नाम शामिल
कसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों (Parliamentary Friendship Groups) का गठन किया है. महाराष्ट्र से सुप्रिया सुले, श्रीकांत शिंदे और प्रफुल्ल पटेल को महत्वपूर्ण देशों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
Parliamentary Friendship Groups: भारत की संसदीय कूटनीति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने दुनिया के 60 से अधिक देशों के साथ 'संसदीय मैत्री समूहों' (Parliamentary Friendship Groups) का गठन किया है. इस पहल में महाराष्ट्र के तीन दिग्गज सांसदों-सुप्रिया सुले (NCP-SP), डॉ. श्रीकांत शिंदे (शिवसेना) और प्रफुल्ल पटेल (NCP)-को शामिल कर राज्य का मान बढ़ाया गया है.
सुप्रिया सुले करेंगी सिंगापुर समूह का नेतृत्व
इस कूटनीतिक पहल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले को एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह सिंगापुर के साथ बनाए गए संसदीय मैत्री समूह का नेतृत्व करेंगी. सुप्रिया सुले अपनी विधायी कुशलता और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समझ के लिए जानी जाती हैं, और अब वे सिंगापुर के सांसदों के साथ भारत के संबंधों को प्रगाढ़ करने की कमान संभालेंगी. यह भी पढ़े: ओम बिरला ने बारबाडोस में कॉमनवेल्थ सम्मेलन में तकनीक और लोकतंत्र पर कार्यशाला की अध्यक्षता की
श्रीकांत शिंदे-प्रफुल्ल पटेल को भी मिली जिम्मेदारी
इस सूची में महाराष्ट्र के दो अन्य प्रमुख नेताओं का नाम शामिल होना राज्य की राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है.
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डॉ. श्रीकांत शिंदे: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को इस वैश्विक टीम का हिस्सा बनाया गया है. युवा नेतृत्व के तौर पर वे अन्य देशों के संसदीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करेंगे.
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प्रफुल्ल पटेल: अनुभवी राजनेता और एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को भी इस महत्वपूर्ण समूह में स्थान दिया गया है. नागरिक उड्डयन और भारी उद्योग जैसे मंत्रालयों के उनके पूर्व अनुभव का लाभ संसदीय कूटनीति में लिया जाएगा.
क्यों बनाए गए हैं 'पार्लियामेंट्री फ्रेंड्स ग्रुप'?
इन समूहों के गठन का मुख्य उद्देश्य भारत की संसद और अन्य देशों की संसदों के बीच सीधा और नियमित संवाद स्थापित करना है.
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मजबूत संबंध: यह पारंपरिक राजनयिक माध्यमों (Diplomatic Channels) के साथ-साथ विधायी स्तर पर भी देशों को करीब लाएगा.
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द्विपक्षीय सहयोग: इन समूहों के माध्यम से व्यापार, संस्कृति और लोकतंत्र के मूल्यों पर चर्चा की जाएगी.
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अनुभव साझा करना: विभिन्न देशों की संसदीय कार्यप्रणालियों और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने का अवसर मिलेगा.
इन देशों के साथ बने हैं मैत्री समूह
लोकसभा सचिवालय के अनुसार, पहले चरण में 60 देशों को चुना गया है. इनमें प्रमुख रूप से अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, जर्मनी, इजरायल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल, श्रीलंका और भूटान शामिल हैं. इसके अलावा यूरोपीय संसद के साथ भी एक विशेष समूह बनाया गया है.
टीम में देश के दिग्गज नेता शामिल
ओम बिरला द्वारा गठित इन समूहों में पक्ष और विपक्ष के कई बड़े चेहरों को जगह मिली है. इसमें अखिलेश यादव, पी. चिदंबरम, शशि थरूर, असदुद्दीन ओवैसी, संजय सिंह, हेमा मालिनी, गौरव गोगोई और सुधांशु त्रिवेदी जैसे सांसद शामिल हैं. यह विविधता दर्शाती है कि विदेशी दौरों और संवाद के मामले में भारत एक एकजुट विधायी दृष्टिकोण अपना रहा है.
आने वाले समय में इस सूची में और भी देशों को जोड़ने की योजना है, जिससे भारत की 'सॉफ्ट पावर' और संसदीय उपस्थिति पूरी दुनिया में और अधिक प्रभावी हो सके.