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Ban Turkey: पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की का बॉयकॉट, बाजार से गायब हो रहे तुर्की के सेब

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव और तुर्की द्वारा खुलेआम पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद देशभर में "Ban Turkey" आंदोलन तेजी से फैल रहा है. इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे शहर के व्यापारियों ने तुर्की से आयात होने वाले सेबों का बहिष्कार करने का फैसला लिया है.

Ban Turkey: पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की का बॉयकॉट, बाजार से गायब हो रहे तुर्की के सेब
Representational Image | Pixabay/ File

पुणे: भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव और तुर्की द्वारा खुलेआम पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद देशभर में "Ban Turkey" आंदोलन तेजी से फैल रहा है. इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे शहर के व्यापारियों ने तुर्की से आयात होने वाले सेबों का बहिष्कार करने का फैसला लिया है. इस फैसले का असर तुरंत बाजार में दिखने लगा और अब तुर्की सेब पुणे की मंडियों से गायब हो चुके हैं. समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के फल बाजार में तुर्की सेबों का सालाना कारोबार करीब 1,000 से 1,200 करोड़ रूपये तक का होता था. लेकिन अब व्यापारियों ने इस आमदनी से ज्यादा देश के सम्मान को प्राथमिकता दी है.

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फल व्यापारी सय्योग झेंडे ने बताया, "हमने तुर्की से सेब खरीदना बंद कर दिया है और अब हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान जैसी जगहों से सेब मंगा रहे हैं. यह सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि देशभक्ति का सवाल है."

ग्राहकों में भी दिखा जोश, तुर्की सेब लेने से किया इंकार

इस अभियान को सिर्फ व्यापारियों का समर्थन ही नहीं मिला, बल्कि स्थानीय ग्राहकों ने भी इस बहिष्कार को अपनाया है. एक फल विक्रेता ने बताया कि तुर्की सेबों की मांग में 50 फीसदी तक की गिरावट आई है. एक ग्राहक ने कहा, "जब हमारे पास देसी सेबों की भरमार है, तो हम ऐसे देश से क्यों खरीदें जिसने भारत के खिलाफ खड़ा होने का फैसला लिया है?"

सरकार से भी उठी सुरक्षा बढ़ाने की मांग

कुछ ग्राहकों ने यह भी सुझाव दिया कि सिर्फ सेब ही नहीं, सरकार को भी ऐसे देशों से आने वाले अन्य उत्पादों पर सख्त निर्णय लेना चाहिए. साथ ही देश में हो रहे आतंकी हमलों को देखते हुए संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग की गई.

तुर्की विरोध का बढ़ता प्रभाव

तुर्की के पाकिस्तान के समर्थन को लेकर जिस तरह से नाराजगी सामने आ रही है, 'Ban Turkey' आंदोलन अब केवल एक आर्थिक बहिष्कार नहीं रह गया है. यह अब एक देशभक्ति की लहर बन चुका है, जिसमें आम नागरिक से लेकर बड़े व्यापारी तक शामिल हो रहे हैं.

जहां एक ओर देश के जवान सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहे हैं, वहीं आम लोग भी अपने-अपने स्तर पर ऐसे देशों को आर्थिक चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जो भारत के खिलाफ खड़े दिखाई देते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on May 13, 2025 05:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).