देश

पत्नी और बेटियों को भरण-पोषण देने से इनकार करने पर डॉक्टर को 6 महीने की सिविल जेल, बॉम्बे हाई कोर्ट का सख्त फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पत्नी और दो बेटियों की देखभाल के लिए गुजारा भत्ता न देने वाले एक डॉक्टर को छह महीने की सिविल जेल की सजा सुनाई है.

पत्नी और बेटियों को भरण-पोषण देने से इनकार करने पर डॉक्टर को 6 महीने की सिविल जेल, बॉम्बे हाई कोर्ट का सख्त फैसला
Bombay High Court | PTI

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पत्नी और दो बेटियों की देखभाल के लिए गुजारा भत्ता न देने वाले एक डॉक्टर को छह महीने की सिविल जेल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने इसे कानून की अवहेलना करार देते हुए कहा कि यह व्यक्ति न केवल न्यायालय के आदेशों की अवमानना कर रहा है, बल्कि अपने परिवार की जरूरतों को भी नजरअंदाज कर रहा है.

ठाणे कोर्ट ने ठुकराई रेलवे की याचिका, रेलवे स्टेशन पर जूता पॉलिश करने वालों को राहत.

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और अध्वैत सेठना की पीठ ने पाया कि डॉक्टर ने बार-बार कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की और अपनी पत्नी और बेटियों को भरण-पोषण देने से इनकार किया. कोर्ट ने कहा, "अभियुक्त (डॉक्टर) को कानून का कोई सम्मान नहीं है और वह न्यायालय के आदेशों की कोई परवाह नहीं करता."

2009 से चल रहा था पारिवारिक विवाद

डॉक्टर और उसकी पत्नी की शादी 2002 में हुई थी, लेकिन 2009 में उनके रिश्ते में दरार आ गई. पति ने तलाक की अर्जी दायर की, जिसे 2015 में फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया, लेकिन गुजारा भत्ते का मुद्दा लंबित रहा. 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टर को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी और बेटियों को हर महीने 35,000 रुपये गुजारा भत्ता दे. लेकिन डॉक्टर ने इस आदेश का पालन नहीं किया. उसकी पत्नी ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि पति लगातार गुजारा भत्ता देने से बच रहा है.

डॉक्टर कानूनी नोटिस लेने से बचता रहा और बार-बार सुप्रीम कोर्ट समेत अन्य अदालतों में अपील दायर करता रहा, लेकिन सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं. जिसके बाद हाईकोर्ट ने बेल योग्य वारंट जारी किया और कई बार उसे चेतावनी दी, लेकिन फिर भी डॉक्टर ने आदेश का पालन नहीं किया. अदालत ने कहा कि वह न केवल कानून का अपमान कर रहा है, बल्कि अपने ही परिवार की बुनियादी जरूरतों की भी अनदेखी कर रहा है.

कोर्ट का सख्त रुख

कोर्ट ने कहा, "यह एक गंभीर मामला है जहां अभियुक्त ने छह वर्षों तक हर संभव तरीके से कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की."न्यायालय ने डॉक्टर की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि गुजारा भत्ते की राशि बहुत अधिक है और वह इसे देने की स्थिति में नहीं है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट तक ने इस आदेश को बरकरार रखा है, इसलिए अब इसे मानना अनिवार्य है. कोर्ट ने कहा कि अब और कोई रियायत नहीं दी जा सकती. न्यायालय ने डॉक्टर को तुरंत हाईकोर्ट पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण करने और हिरासत में लेने का आदेश दिया.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 08, 2025 09:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).