Bharat Bandh on February 12: ट्रेड यूनियनों और किसानों का बड़ा ऐलान, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में 12 फरवरी को 'भारत रहेगा बंद', जानें क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद

भारत में 12 फरवरी, 2026 को किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी 'भारत बंद' का आह्वान किया है. यह हड़ताल मुख्य रूप से भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और नए श्रम कानूनों के विरोध में बुलाई गई है.

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Bharat Bandh on February 12: देश के प्रमुख किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आगामी गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी 'भारत बंद' का आह्वान किया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को "आर्थिक संप्रभुता पर हमला" बताते हुए इस हड़ताल की घोषणा की है. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस समझौते से घरेलू कृषि और डेयरी क्षेत्र को भारी नुकसान होगा. यह भी पढ़े:  India–US Trade Deal: भारत-अमेरिका के बीच हुआ ट्रेड डील, जानें कौन-कौन से सामान हो सकते हैं सस्ते? यहां देखें लिस्ट

विरोध का मुख्य कारण

प्रदर्शनकारी संगठनों का सबसे बड़ा विरोध भारत-अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार ढांचे को लेकर है. इसके तहत:

ट्रेड यूनियनों की मांगें और भागीदारी

इस हड़ताल में CITU, AITUC और INTUC जैसी 10 बड़ी ट्रेड यूनियनें शामिल हैं. उनका दावा है कि इस बंद में देशभर के लगभग 30 करोड़ कर्मचारी हिस्सा लेंगे. उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. श्रम संहिता (Labour Codes): चार नई श्रम संहिताओं को रद्द करना, जिन्हें यूनियनें श्रमिक विरोधी मानती हैं.

  2. MGNREGA का मुद्दा: ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को 'VB-GRAM G' मिशन से बदलने का विरोध.

  3. निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई के फैसले को वापस लेना.

बैंक और परिवहन सेवाओं पर असर की संभावना

12 फरवरी को होने वाले इस बंद का असर बैंकिंग और परिवहन सेवाओं पर व्यापक रूप से पड़ सकता है.

सुरक्षा और प्रशासन की तैयारी

केंद्र और राज्य सरकारों ने इस बंद को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं.

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