Barsana Holi 2025: मथुरा के राधा रानी मंदिर में खेली गई लड्डू और लट्ठमार होली, Video में देखें भक्तों का उत्साह
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मथुरा: होली का त्योहार भले ही पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता हो, लेकिन मथुरा के बरसाना की होली का रंग ही अलग होता है. गुरुवार को श्री राधा रानी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने लड्डू होली और लट्ठमार होली खेलकर इस अद्भुत परंपरा को जीवंत कर दिया. बरसाना होली को लेकर एक भक्त ने कहा, "यह छठी बार है जब मैं यहां होली खेलने आया हूं. एक बार अगर कोई यहां होली खेल ले, तो फिर वह कहीं और जाने के बारे में सोच भी नहीं सकता!"

क्या है बरसाना होली की अनूठी परंपरा?

बरसाना होली से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है. माना जाता है कि जब भगवान कृष्ण ने देखा कि उनकी त्वचा का रंग सांवला है और राधा जी का रंग गोरा है, तो वह उदास हो गए. इस पर माता यशोदा ने उन्हें राधा और गोपियों को रंगने की सलाह दी. कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना पहुंचे और राधा व गोपियों पर रंग डालने लगे. इस खेल में गोपियों ने भी उन्हें डंडों (लाठियों) से छेड़ने का मजेदार तरीका अपनाया, जो बाद में ‘लट्ठमार होली’ के रूप में प्रसिद्ध हो गया.

होली के रंग, भक्ति के संग

कैसे खेली जाती है बरसाना की होली?

लड्डू होली: बरसाना होली की शुरुआत राधा रानी मंदिर में लड्डू फेंकने की परंपरा से होती है. श्रद्धालु एक-दूसरे पर प्रसाद रूप में लड्डू उछालते हैं, जिससे माहौल भक्तिमय और आनंदमय हो जाता है.

लट्ठमार होली: इसके बाद गोप और गोपियां रंग और डंडों के साथ होली खेलते हैं. गोप जहां राधा जी और उनकी सखियों को रंगने की कोशिश करते हैं, वहीं गोपियां उन्हें बांस की लाठियों (लट्ठ) से मारती हैं.

इसके साथ ही मंदिर में कीर्तन, भजन और श्रीकृष्ण-राधा की लीलाओं का मंचन होता है, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.

विदेशों से भी उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

बरसाना होली का आकर्षण सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे देखने के लिए विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. हर साल हजारों भक्त इस अनोखी होली का हिस्सा बनते हैं और भक्ति में डूबकर रंगों का आनंद उठाते हैं.