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Barakatullah University Renamed: मध्य प्रदेश में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित, अब इसका नाम होगा 'वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी'

मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने के प्रस्ताव को कार्यपरिषद ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है. यह बदलाव भारतीय संस्कृति और राजा भोज की विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से किया जा रहा है

Barakatullah University Renamed: मध्य प्रदेश में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित, अब इसका नाम होगा 'वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी'
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Barakatullah University Renamed:  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है. विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (ईसी) ने बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में संस्थान का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है. 56 साल पुराने इस विश्वविद्यालय के इतिहास में यह तीसरी बार है जब नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई है. कार्यपरिषद से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए राजभवन और राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है.

नाम परिवर्तन के पीछे का मुख्य तर्क

विश्वविद्यालय प्रशासन और कार्यपरिषद द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में नाम बदलने के पक्ष में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तर्क दिए गए हैं. प्रशासन का मानना है कि राजा भोज इस क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के सबसे बड़े प्रतीक हैं. इतिहासकारों के अनुसार भोपाल का प्राचीन नाम भी 'भोजपाल' ही था, जो प्रतापी राजा भोज के नाम पर आधारित था.   यह भी पढ़े:  Search इलाहाबाद जंक्शन बना प्रयागराज जंक्शन, यूपी के चार रेलवे स्टेशनों के बदले गए नाम इलाहाबाद जंक्शन बना प्रयागराज जंक्शन, यूपी के चार रेलवे स्टेशनों के बदले गए नाम

इसके अलावा 'वाग्देवी' ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती का स्वरूप हैं. धार की ऐतिहासिक भोजशाला में स्वयं राजा भोज ने वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी. विवि प्रशासन का कहना है कि यह नया नाम भारतीय शिक्षा परंपरा और क्षेत्रीय गौरवशाली इतिहास के पूरी तरह अनुकूल है.

मौलाना बरकतउल्ला का योगदान और विवि का इतिहास

वर्तमान में इस विश्वविद्यालय का नाम महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी विचारक मौलाना बरकतउल्ला खान भोपाली के नाम पर है. 1854 में भोपाल में जन्मे मौलाना बरकतउल्ला ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी. साल 1915 में अफगानिस्तान के काबुल में गठित भारत की पहली निर्वासित अस्थायी सरकार में वे प्रधानमंत्री भी बने थे.

हालांकि, नाम बदलने के प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि मौलाना बरकतउल्ला का अधिकांश जीवन विदेशों में बीता. राजा भोज की तुलना में भोपाल के विकास, नगर नियोजन और सांस्कृतिक उत्थान में उनका कोई सीधा योगदान नजर नहीं आता है. उल्लेखनीय है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1970 में 'भोपाल विश्वविद्यालय' के रूप में हुई थी और बाद में 1988 में स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान में इसका नाम 'बरकतउल्ला विश्वविद्यालय' किया गया था.

आगे की कानूनी प्रक्रिया और अकादमिक बदलाव

कार्यपरिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे उच्च शिक्षा विभाग और मोहन यादव सरकार के पास भेजा जा रहा है. चूंकि सरकारी विश्वविद्यालय राज्य अधिनियम (State Act) के तहत संचालित होते हैं, इसलिए इस नाम को आधिकारिक रूप से लागू करने के लिए विधानसभा में एक संशोधन विधेयक लाया जाएगा. विधानसभा से पारित होने और कुलाधिपति (राज्यपाल) की मंजूरी मिलने के बाद इसे राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा.

नाम बदलने के साथ ही विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे को भी आधुनिक और प्रासंगिक बनाने की योजना है. इसके तहत अरबी और पर्शियन जैसे पारंपरिक भाषा विभागों को मिलाकर एक नए 'तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग' के रूप में पुनर्गठित करने की तैयारी चल रही है. हालांकि, इस ऐतिहासिक संस्थान का नाम बदलने के फैसले को लेकर कुछ सियासी और सामाजिक हलकों से विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 04, 2026 03:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).