Madhya Pradesh News: एमपी के नर्मदापुरम में रसोई में सांप ने महिला को 5 बार डसा, डॉक्टरों ने 24 घंटे में 35 इंजेक्शन देकर बचाई जान
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में रसोई की सफाई के दौरान सांप द्वारा 5 बार काटी गई महिला को डॉक्टरों ने 35 इंजेक्शन देकर बचा लिया. परिजनों द्वारा झाड़-फूंक के प्रयास के बाद हालत बिगड़ने पर महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जहरीले सांप के 5 बार काटने के बावजूद महिला को डॉक्टरों की समय पर दी गई आपातकालीन चिकित्सा की मदद से बचा लिया गया. झील पिपरिया गांव की रहने वाली राधा बाई अहिरवार पर रसोई की सफाई के दौरान सांप ने हमला किया था.
अस्पताल में बेहद गंभीर हालत में पहुंची महिला को डॉक्टरों ने 24 घंटे के भीतर 35 आपातकालीन इंजेक्शन (एंटी-स्नेक वेनम और एट्रोपिन) दिए. समय पर मिले इलाज के कारण महिला की जान बच गई, हालांकि डॉक्टरों को उनकी सूजी हुई अंगुली का ऑपरेशन करना पड़ा है.
रसोई घर में बर्तन समेटते वक्त हुआ हमला
पीड़िता राधा बाई के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब वह खाना बनाने के बाद रसोई की अलमारी में रखे बर्तन समेट रही थीं. अलमारी में बर्तनों के बीच छिपा लगभग 5 फीट लंबा काला सांप अचानक निकल आया और उसने राधा बाई के दाहिने हाथ और हथेली पर हमला कर दिया.
महिला ने जब हाथ झटकने की कोशिश की, तो सांप ने महज दो मिनट के भीतर उन पर बार-बार हमला कर 5 बार डस लिया. हमले के तुरंत बाद महिला बेहोश होकर घर के फर्श पर गिर पड़ी.
पहले झाड़-फूंक का सहारा, फिर बिगड़ी हालत
घटना के बाद महिला के पति सुखराम अहिरवार और परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय दोपहर करीब 1 बजे गांव के एक झाड़-फूंक करने वाले (तांत्रिक) के पास ले गए. हालांकि, तांत्रिक ने महिला की गंभीर हालत को देखते हुए इलाज करने से इनकार कर दिया.
इस दौरान शरीर में जहर फैलने के लक्षण साफ दिखाई देने लगे थे. महिला की आंखें बंद हो रही थीं और उसे सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ हो रही थी. इसके बाद परिजन आनन-फानन में दोपहर 2:10 बजे के करीब उसे पिपरिया सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे.
24 घंटे में दिए गए 25 एंटी-वेनम समेत 35 इंजेक्शन
अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टर देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि जब मरीज को लाया गया, तो उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी. जहर तेजी से शरीर और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम में फैल रहा था.
| इंजेक्शन का प्रकार | दी गई खुराक (Dose) | प्रभाव और उद्देश्य |
| एंटी-स्नेक वेनम (ASV) | 25 इंजेक्शन | शरीर में फैले जहर को बेअसर करने के लिए (शुरुआती 40 मिनट में 10 डोज) |
| एट्रोपिन (Atropine) | 10 इंजेक्शन | सांस लेने में आ रही रुकावट और दिल की धड़कन नियंत्रित करने के लिए |
डॉक्टरों ने इलाज के पहले 40 मिनट में ही एएसवी (ASV) के 10 इंजेक्शन दिए. अगले 24 घंटों में 25 एएसवी और 10 एट्रोपिन समेत कुल 35 इंजेक्शन दिए गए, जिसके बाद महिला की स्थिति में सुधार आया.
परिवार ने प्रशासन से मांगी आर्थिक मदद
महिला की जान तो बच गई, लेकिन जहर के असर से उसके हाथ की एक अंगुली में भारी सूजन आ गई थी, जिसे ठीक करने के लिए जिला अस्पताल में सर्जिकल ऑपरेशन करना पड़ा.
पीड़िता के पति सुखराम मजदूरी करते हैं और उनकी एक बेटी कक्षा 5 में पढ़ती है. हादसे के बाद से राधा बाई काम करने में असमर्थ हैं, जिससे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है. परिवार ने स्थानीय प्रशासन से आर्थिक सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 04, 2026 11:54 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

