AI-Powered Drone India: भारत की रक्षा तकनीक एक नए मुकाम पर पहुंच गई है. बेंगलुरु की एक रक्षा कंपनी BSS Alliance (Bharat Supply and Service) ने देश का पहला ऐसा ड्रोन सिस्टम विकसित किया है, जिसमें हथियार भी जुड़ा है और जो AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऑपरेट होता है. हाल ही में इस सिस्टम का सफल परीक्षण भारतीय सेना के साथ किया गया है. इस खास ड्रोन प्लेटफॉर्म में AK-203 असॉल्ट राइफल को जोड़ा गया है और यह खासतौर पर लो-एल्टिट्यूड टैक्टिकल ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है.
यह न केवल निगरानी कर सकता है, बल्कि दूर से ही दुश्मन को निशाना बनाकर फायरिंग भी कर सकता है.
भारत का पहला AI-ड्रोन हथियार सिस्टम
The next innovative leap at @BSS_Alliance after #TRIYAM-#3D
A game-changing evolution in low-flying tactical drone warfare—integrating an #AssaultRifle, ideally #AK203, with a low-altitude, high-agility drone platform for #Precision #Mobility #Lethality#DroneWarfare #DroneAK203 pic.twitter.com/iXTAA0MxpD
— BSS - Bharat Supply & Support - Alliance (@BSS_Alliance) June 25, 2025
टारगेट को खुद पहचान कर लगा सकता है निशाना
BSS Alliance ने इसी हफ्ते एक और बड़ा कदम उठाते हुए भारत का पहला AI-आधारित लाइट मशीन गन (LMG) सिस्टम भी टेस्ट किया है. इस सिस्टम में इजरायल की नेगेव 7.62×51 मिमी मशीन गन को AI के ज़रिए ऑपरेट किया गया. खास बात यह है कि यह सिस्टम टारगेट को खुद पहचान कर 600 मीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगा सकता है.
'किसी भी गन को .50 कैलिबर तक चला सकता है'
कंपनी के को-फाउंडर विक्की चौधरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि, “यह भारत का पहला ऐसा हथियार है जो AI के ज़रिए किसी भी गन को .50 कैलिबर तक चला सकता है.” उन्होंने यह भी कहा कि दुनियाभर में बहुत कम कंपनियां हैं जो ऐसे ऑटोनॉमस हथियारों के सफल परीक्षण कर पाई हैं.
प्लेटफॉर्म थर्मल और ऑप्टिकल सेंसर से है लैस
यह AI आधारित प्लेटफॉर्म थर्मल और ऑप्टिकल सेंसर से लैस है, जो कम रोशनी में भी टारगेट को पहचान सकता है. यह सिस्टम हवा, तापमान और दूरी के आधार पर खुद बैलिस्टिक कैलकुलेशन कर लेता है और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क से रिमोट कंट्रोल किया जा सकता है.
उत्तराखंड के रुड़की में हुआ पहला सफल ट्रायल
पहला ट्रायल 5 अप्रैल को रुड़की में हुआ था और उसके बाद 14,500 फीट की ऊंचाई पर भी इसका परीक्षण किया गया, जहां यह पूरी तरह से सफल रहा. यह सिस्टम बंकर में 21 दिन तक बिना रुके काम कर सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे वाहनों और नेवी के जहाज़ों पर भी लगाया जा सकता है.
“मेक इन इंडिया” के तहत बनाया जा रहा ड्रोन
भारत सरकार ने “मेक इन इंडिया” के तहत AI-आधारित रक्षा परियोजनाओं के लिए हर साल ₹100 करोड़ का बजट तय किया है. सेना में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है.
सैन्य शक्ति को ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम
गौरतलब है कि भारत AK-203 राइफल्स की 7.7 लाख यूनिट्स ऑर्डर कर चुका है और 1.4 लाख SIG716 राइफल्स पहले ही अमेरिका से ली जा चुकी हैं. इन आधुनिक हथियारों को अब AI ड्रोन जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ जोड़ना भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम है.













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