राजनीति से रिटायरमेंट लेने के बाद क्या करेंगे अमित शाह? गृह मंत्री ने बताया अपना फ्यूचर प्लान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अहमदाबाद में एक कार्यक्रम में अपने भविष्य के बारे में एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से रिटायरमेंट लेने के बाद वे अपना पूरा जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन को समर्पित करेंगे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अहमदाबाद में एक कार्यक्रम में अपने भविष्य के बारे में एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से रिटायरमेंट लेने के बाद वे अपना पूरा जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन को समर्पित करेंगे. शाह का मानना है कि प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह खेती की गुणवत्ता और उत्पादन को भी बढ़ाती है.
अमित शाह ने कहा, "रासायनिक खाद से उगाया गया गेहूं शरीर को कई बीमारियों की ओर ले जाता है, जबकि प्राकृतिक खेती से न केवल रोगों से मुक्ति मिलती है बल्कि यह खेती की उपज भी बढ़ाती है." उन्होंने प्राकृतिक खेती को एक वैज्ञानिक प्रयोग बताते हुए युवाओं को इससे जुड़ने की सलाह दी.
सहकारिता मंत्रालय को बताया सबसे बड़ा जिम्मा
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब उन्हें गृह मंत्रालय मिला था तो सभी ने इसे बहुत बड़ी जिम्मेदारी माना, लेकिन जब उन्हें सहकारिता मंत्रालय मिला, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह देश के किसानों, गरीबों और ग्रामीणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विभाग है.
अमित शाह ने बताया अपना रिटायरमेंट प्लान
Ahmedabad, Gujarat: Union Home Minister Amit Shah says, "I have decided that after retirement, I will dedicate the rest of my life to studying the Vedas, Upanishads, and natural farming. Natural farming is a scientific experiment that offers many benefits..." pic.twitter.com/BQBC6DX4Ps
— IANS (@ians_india) July 9, 2025
त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की नींव रखी
अमित शाह ने इस दौरान त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की नींव रखी, जिसका नाम स्व. त्रिभुवन काका के नाम पर रखा गया है. शाह ने कहा, "आज जहां भी सहकारी संस्थाएं हैं, वहां के लोग करोड़ों रुपये तक कमा रहे हैं. यह सब त्रिभुवन काका की दूरदृष्टि का परिणाम है." उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने संसद में त्रिभुवन काका के नाम का विरोध किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि विश्वविद्यालय का नाम उन्हीं के नाम पर रहेगा. "गुजरात की महिलाएं आज भी त्रिभुवन काका को आशीर्वाद देती हैं," शाह ने कहा.
ऊंटनी के दूध से महिलाओं को मिली आर्थिक शक्ति
कार्यक्रम में गुजरात की मिरल बेन रबारी ने अमित शाह को बताया कि कैसे ऊंटनी का दूध सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बेचा जा रहा है और इससे किसानों को लाभ हो रहा है. साथ ही, इस दूध के औषधीय गुण लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार ला रहे हैं.
कार्यक्रम के अंत में अमित शाह के कार्यालय की ओर से यह कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को पूरा करने के लिए सहकारिता मंत्रालय पूरी निष्ठा से काम कर रहा है. अमित शाह की यह सोच दर्शाती है कि राजनीति से आगे भी वे समाज, संस्कृति और कृषि के क्षेत्र में योगदान देने के लिए तैयार हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 09, 2025 05:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

