8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग क्यों उठी? जानिए पूरा गणित

8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है. इस बीच कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक वेतन को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग रखी है. यह प्रस्ताव नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) की कर्मचारी पक्ष की ओर से दिया गया है. आइए जानते हैं कि 69,000 रुपये की मांग किस आधार पर की जा रही है. 8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 65% बढ़ोतरी की मांग तेज, वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की उठी मांग

69,000 रुपये की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 2016 में लागू 7वें वेतन आयोग के तहत तय किया गया 18,000 रुपये का न्यूनतम वेतन अब मौजूदा महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन की लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है.

इसी वजह से कर्मचारी संगठनों ने एक नया 'नीड बेस्ड' (आवश्यकता आधारित) वेतन निर्धारण मॉडल प्रस्तावित किया है. इसमें परिवार का आकार, पोषण, आवास, बिजली-पानी, ईंधन, शिक्षा और अन्य जरूरी खर्चों को शामिल किया गया है.

परिवार की परिभाषा में बड़ा बदलाव

कर्मचारी संगठनों ने वेतन तय करने के लिए परिवार की परिभाषा में भी बदलाव का सुझाव दिया है.

7वें वेतन आयोग में परिवार की गणना इस प्रकार थी.

  • कर्मचारी - 1 यूनिट
  • जीवनसाथी - 0.8 यूनिट
  • दो बच्चे - 1.2 यूनिट

अब एनसी-जेसीएम ने इसे बढ़ाकर पांच यूनिट करने का प्रस्ताव दिया है.

प्रस्तावित नया मॉडल.

  • कर्मचारी - 1 यूनिट
  • जीवनसाथी - 1 यूनिट
  • दो बच्चे - 0.8-0.8 यूनिट (कुल 1.6)
  • आश्रित माता-पिता और सास-ससुर - 0.8 यूनिट

कुल मिलाकर इसे लगभग 5 यूनिट मानकर वेतन की गणना करने का सुझाव दिया गया है.

जीवन-यापन के खर्च में भी बदलाव का सुझाव

कर्मचारी संगठनों ने दैनिक खर्चों के लिए भी नए मानक प्रस्तावित किए हैं.

  • पोषण: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार प्रतिदिन 3,490 कैलोरी की जरूरत को आधार बनाया जाए.
  • आवास: कुल खर्च में मकान का हिस्सा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत किया जाए.
  • बिजली, पानी और ईंधन: इन पर कुल खर्च का 20 प्रतिशत निर्धारित किया जाए.
  • सामाजिक और व्यक्तिगत जरूरतें: कौशल विकास के लिए 25 प्रतिशत तथा विवाह, त्योहार और अन्य सामाजिक खर्चों के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत का प्रावधान किया जाए.

क्या है फिटमेंट फैक्टर का गणित?

69,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी की मांग के पीछे 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव है. कर्मचारी संगठनों ने यही फिटमेंट फैक्टर पेंशन संशोधन पर भी लागू करने की सिफारिश की है.

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. हाल के महीनों में 2 से 2.5 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.

अभी अंतिम फैसला नहीं

फिलहाल 69,000 रुपये की न्यूनतम सैलरी सिर्फ कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है. 8वां वेतन आयोग देशभर से कर्मचारियों, मंत्रालयों और अन्य संबंधित पक्षों की राय ले रहा है. आयोग ने कर्मचारी डेटा जमा करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई तक बढ़ा दी है. इन सभी सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिश केंद्र सरकार को सौंपेगा. यदि न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव होता है, तो इसका असर वेतन, भत्तों और पेंशन सहित पूरे वेतन ढांचे पर पड़ेगा.