8th Pay Commission: पेंशनभोगियों ने उठाई बड़ी मांग, कर्मचारियों को मिले OPS, NPS और UPS में से अपनी पसंद का विकल्प चुनने की आजादी

8वें वेतन आयोग के समक्ष देश भर के कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने एक बिल्कुल नई मांग रख दी है. कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है कि सरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को ओल्ड पेंशन स्कीम, नेशनल पेंशन सिस्टम और यूनिफाइड पेंशन स्कीम में से किसी एक को चुनने की स्वायत्तता दे.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 29 मई: आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के समक्ष देश भर के सरकारी कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों द्वारा दिए जा रहे सुझावों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण मांग तेजी से जोर पकड़ रही है. विभिन्न कर्मचारी निकायों ने सरकार से पुरजोर वकालत की है कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के बीच स्वतंत्र रूप से चयन करने का विकल्प (Option) दिया जाना चाहिए. इस प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि हर कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की आवश्यकताएं एक जैसी नहीं होती हैं, इसलिए एक ही प्रकार का पेंशन मॉडल सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता. कर्मचारियों को यह लचीलापन मिलना चाहिए कि वे अपने वित्तीय लक्ष्यों और भविष्य की योजनाओं के अनुसार सही पेंशन संरचना का चुनाव कर सकें. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Latest News: केंद्रीय कर्मचारियों ने उठाई नए 'पेंशन विकल्प' की मांग, जानें क्या है यूनियनों का पूरा प्रस्ताव

क्या है ओपीएस, एनपीएस और यूपीएस विकल्प की मुख्य मांग?

कर्मचारी प्रतिनिधियों द्वारा वेतन आयोग के पैनल के साथ साझा किए गए इस नए प्रस्ताव के तहत, सरकारी कर्मचारियों को किसी एक निश्चित पेंशन प्रणाली से बांधने के बजाय, उन्हें विभिन्न उपलब्ध पेंशन ढांचों के बीच स्विच करने या चुनने की आजादी देने पर विचार किया जा रहा है.

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, 1 जनवरी 2004 के बाद सरकारी सेवा में शामिल होने वाले अधिकांश केंद्रीय कर्मचारी अनिवार्य रूप से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के दायरे में आते हैं. हालांकि, सरकार ने पिछले वर्ष अंशदान-आधारित ढांचे को बनाए रखते हुए एक सुनिश्चित पेंशन घटक प्रदान करने के उद्देश्य से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को भी पेश किया था. इसके बावजूद, कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि श्रमिकों का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को प्राथमिकता देता है, क्योंकि यह बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहने के बजाय अंतिम आहरित वेतन के आधार पर एक निश्चित मासिक आय की गारंटी प्रदान करती है.

पेंशनभोगी क्यों चाहते हैं अपनी पसंद का विकल्प?

इंडियाटुडे.इन (IndiaToday.in) से बात करते हुए एक केंद्रीय कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, "बड़ी संख्या में कर्मचारी लगातार ओपीएस, एनपीएस और यूपीएस की आपस में तुलना कर रहे हैं. उनके व्यक्तिगत पारिवारिक और वित्तीय हालात के आधार पर सभी की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। हमारी मांग है कि कर्मचारियों को उनके अनुकूल ढांचा चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिले."

पूरी बहस मुख्य रूप से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली वित्तीय सुरक्षा और स्पष्टता के इर्द-गिर्द केंद्रित है. जहां ओपीएस के तहत पेंशन पूरी तरह सुरक्षित होती है और कर्मचारी के अंतिम मूल वेतन व महंगाई भत्ते (DA) से जुड़ी होती है, वहीं एनपीएस पूरी तरह से निवेश कोष और बाजार के प्रदर्शन पर टिकी होती है. यूपीएस इन दोनों के बीच का एक रास्ता है, जो अंशदान मॉडल के भीतर सुनिश्चित पेंशन की सुविधा देता है. यूनियन नेता ने कहा कि अलग-अलग कर्मचारियों की जोखिम उठाने की क्षमता (Risk Profiles) भिन्न होती है, इसलिए वे अपनी पोस्ट-रिटायरमेंट इनकम को लेकर एक निश्चित आत्मविश्वास चाहते हैं.

क्या वर्तमान में उपलब्ध है स्विच करने की सुविधा?

वर्तमान नियमों के मुताबिक, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के पास ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के बीच स्वतंत्र रूप से अपनी मर्जी से स्विच करने का कोई कानूनी या प्रशासनिक प्रावधान उपलब्ध नहीं है.

इस प्रकार के किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के उच्च स्तर पर नीतिगत निर्णय और वेतन आयोग जैसी संबंधित अथॉरिटी की औपचारिक सिफारिशों की आवश्यकता होगी. कर्मचारी संगठनों का मानना है कि चूंकि पेंशन का मुद्दा सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों के लिए सबसे संवेदनशील विषय बन चुका है, इसलिए इस पर गहन चर्चा होना अनिवार्य है. यूनियन प्रतिनिधि ने सकारात्मक संकेत देते हुए बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में इस प्रस्ताव पर चर्चा काफी सक्रिय हुई है और उम्मीद है कि अगले दो से चार महीनों में इस विषय पर अधिक स्पष्टता आ जाएगी. हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान या नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग पर बड़ी अपडेट, कर्मचारियों की सैलरी में होगी भारी बढ़ोतरी? जानें सरकार क्यों खारिज कर सकती है 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियमों पर भी हो रहा मंथन

व्यापक पेंशन विकल्प की इस मांग के अतिरिक्त, कर्मचारी संगठन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले कर्मचारियों के नियमों में भी बड़े सुधार की वकालत कर रहे हैं.

प्रस्ताव के अनुसार, जो कर्मचारी समय से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनते हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के ठीक अगले दिन से ही संबंधित पेंशन संरचना के तहत तत्काल पेंशन लाभ मिलना शुरू हो जाना चाहिए. यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि योगदान-आधारित आधुनिक पेंशन प्रणालियों (NPS/UPS) के तहत मिलने वाले सेवानिवृत्ति लाभों की गणना पारंपरिक ओपीएस ढांचे की तुलना में काफी अलग और वित्तीय रूप से जटिल है, जिससे वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों में अनिश्चितता का माहौल रहता है.

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