नई दिल्ली, 25 मई: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। देश के केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे में सुधार के लिए गठित किया गया 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) इस समय विभिन्न हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहा है। इस चर्चा का सबसे मुख्य और संवेदनशील बिंदु 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) बना हुआ है। विभिन्न कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए इस बार लगभग 3.8 के फिटमेंट फैक्टर (गुणांक) की जोरदार मांग की है। यदि आयोग इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो एंट्री-लेवल (शुरुआती स्तर) के कर्मचारियों का मूल वेतन सीधे 18,000 रुपये से बढ़कर 68,400 रुपये हो जाएगा, जिसने एक नई आर्थिक और प्रशासनिक बहस को जन्म दे दिया है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के लिए करना पड़ सकता है 2027 तक का इंतजार, जानें ताजा अपडेट
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे काम करता है इसका फॉर्मूला?
सरल शब्दों में कहें तो फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) होता है, जिसका उपयोग नए वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों के संशोधित मूल वेतन और पेंशन की गणना करने के लिए किया जाता है. जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो वह पिछले वेतन आयोग के मूल वेतन को इस फैक्टर से गुणा करके नया वेतन ढांचा तैयार करता है.
उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर अपनाया था. इसके कारण 6ठे वेतन आयोग का न्यूनतम मूल वेतन जो 7,000 रुपये था, वह बढ़कर 18,000 रुपये हो गया था. इसका गणितीय फॉर्मूला इस प्रकार था:
$$7000 \times 2.57 = 17,990$$
बाद में इस राशि को राउंड-ऑफ (निकटतम पूर्णांक) करके 18,000 रुपये निर्धारित किया गया था. अब 8वें वेतन आयोग में इसी 18,000 रुपये को आधार (Base Salary) मानकर आगे का संशोधन किया जाएगा.
यदि 3.8 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ, तो कितना बदलेगा वेतन?
महंगाई के मौजूदा दौर और पेंशनभोगियों की चिंताओं का हवाला देते हुए कई प्रतिनिधि निकायों ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में गुणांक कम से कम 3.8 होना चाहिए. यदि आयोग इस ऊंचे फिटमेंट फैक्टर पर अपनी सहमति दे देता है, तो न्यूनतम वेतन की गणना इस प्रकार होगी:
$$18000 \times 3.8 = 68,400$$
इसके लागू होने से सबसे कनिष्ठ स्तर के कर्मचारी का न्यूनतम मूल वेतन ₹68,400 हो जाएगा. इसी अनुपात में विभिन्न पे-ग्रेड और उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों के वेतन में भी आनुशामिक और भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: 2027 तक लागू हो सकता है आठवां वेतन आयोग, 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की संभावना; सुझाव में यूनियनों ने रखी ये मांगें
आजादी के बाद से अब तक: कैसे बदला न्यूनतम बेसिक पे का इतिहास?
भारत में अब तक कुल सात वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं. पहले वेतन आयोग का गठन जनवरी 1946 में हुआ था. स्थापित परंपरा के अनुसार, हर 10 साल में एक नए आयोग का गठन किया जाता है. वर्तमान 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था, जिसे अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है.
दशकों के दौरान न्यूनतम मूल वेतन में हुए बदलावों को हम इस तालिका के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं:
| वेतन आयोग | न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) |
| पहला वेतन आयोग | INR 55 |
| दूसरा वेतन आयोग | INR 80 |
| तीसरा वेतन आयोग | INR 185 |
| चौथा वेतन आयोग | INR 750 |
| पांचवां वेतन आयोग | INR 2,550 |
| छठा वेतन आयोग | INR 7,000 (यहाँ से फिटमेंट फैक्टर 1.86 शुरू हुआ) |
| 7वां वेतन आयोग | INR 18,000 (फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू हुआ) |
उल्लेखनीय है कि वेतन की गणना में 'फिटमेंट फैक्टर' की यह औपचारिक प्रणाली 6ठे वेतन आयोग से शुरू हुई थी, जिसने 1.86 के गुणांक का उपयोग किया था. इससे पहले के वेतन आयोगों में वेतन संशोधन के लिए 'पे रैशनलाइजेशन' (वेतन युक्तिकरण) और आवश्यकता-आधारित मजदूरी संरचना जैसे अन्य पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था.
अंतिम निर्णय का इंतजार, परामर्श प्रक्रिया जारी
वर्तमान में 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मिले ज्ञापनों और सुझावों की गहन समीक्षा कर रहा है. सरकार या आयोग की तरफ से अभी फिटमेंट फैक्टर के अंतिम आंकड़े या संशोधित वेतन ढांचे पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है. सभी पक्षों के साथ परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम ड्राफ्ट रिपोर्ट कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करेगा, जिसके बाद ही अंतिम वेतन वृद्धि की तस्वीर साफ हो पाएगी.











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