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यौन उत्पीड़न रोकने की पहल है 'अंतरंग दृश्य पर्यवेक्षक' की नियुक्ति : सेलिना जेटली

बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली (Celina Jaitly) ने पत्रकार-लेखक राम कमल मुखर्जी निर्देशित लघु फिल्म में उनके अंतरंग दृश्यों को परखने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने का आखिरकार राज खोल ही दिया.

यौन उत्पीड़न रोकने की पहल है 'अंतरंग दृश्य पर्यवेक्षक' की नियुक्ति : सेलिना जेटली
सेलिना जेटली (Photo Credit- Instagram)

मुंबई:  बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली (Celina Jaitly) ने पत्रकार-लेखक राम कमल मुखर्जी निर्देशित लघु फिल्म में उनके अंतरंग दृश्यों को परखने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने का आखिरकार राज खोल ही दिया. उन्होंने कहा कि यह यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए एक पहल है, ताकि ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके और इसके अलावा भी इस क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरूरत है. इसके लिए उचित दिशा-निर्देश, विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी नियम बनाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न एक ऐसी हिंसा है जिसे नपुंसकों द्वारा अंजाम दिया जाता है. ऐसे में अंतरंग दृश्यों के पर्यवेक्षक का मुख्य कर्तव्य है कि वह कार्यस्थल पर कड़ी निगरानी रखे, ताकि कोई ऐसी घटना न हो. सेलिना इस बात से भी सहमत दिखीं कि सामान्य परिस्थितियों में निर्देशक का यह कर्तव्य है कि वह इस बात का ध्यान रखे कि सेट पर कोई भी निर्धारित सीमा का उल्लंघन न करे.

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उन्होंने कहा, "मैं इस बात से बिल्कुल सहमत हूं, लेकिन मैंने कई बार ऐसा देखा है और मेरा यह व्यक्तिगत अनुभव है कि प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति को उसका मानसिक दृष्टिकोण सबसे अधिक प्रभावित करता है. मैंने हाल ही में पढ़ा था कि किसी प्रभावशाली पद पर आसीन महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में दूसरों के सामने कमजोर नजर आने का एक डर रहता है, जिसे छुपाने के लिए वह ऐसी यौन हिंसा जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं."

उन्होंने कहा कि ज्यादातर प्रभावशाली व्यक्ति अपने मन में यह गलत धारणा बना लेता है कि अगर उसके साथ कोई काम करने में दिलचस्पी रखता है तो उसका यौन उत्पीड़न करना उस व्यक्ति का अधिकार है, जबकि यह गलत है. ऐसे में अंतरंग दृश्यों के पर्यवेक्षक की उपस्थिति काफी मददगार साबित होती है. सेलिना ने कहा, "हमारी फिल्म 'सीजन्स ग्रीटिंग्स' में निर्देशक राम क मल मुखर्जी ने एक ही समय पर कलात्मकता पर ध्यान देने के साथ ही काम के दौरान सही और गलत क्या है, इस बात का भी बखूबी ध्यान रखा. अंतरंग दृश्यों की शूटिंग के दौरान यौन दुर्व्यवहार का सबसे ज्यादा डर रहता है. अभिनय और दुर्व्यवहार के बीच काफी पतली रेखा होती है."

उन्होंने कहा, "मैं इस बात की शुक्रगुजार हूं कि राम कमल जैसे निर्देशक और अरित्रा जैसे निर्माता इस बॉलीवुड जगत में अभी भी हैं. हमने कार्यस्थल पर यौन दुर्व्यवहार से लड़ने के लिए कम से कम एक नींव डाली है, ताकि इसे पूरी तरह से रोका जा सके. मनीषा घोष ने भी फिल्म के सेट पर निर्देशक और कलाकारों के बीच एक ब्रिज की अहम भूमिका निभाई."

उन्होंने कहा, "मैं जब 16 साल की थी, तब से काम कर रही हूं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि मुझे अंतरंग दृश्य पर्यवेक्षक का सान्निध्य मिला, जो कि काफी रोमांचक था." इस दौरान उन्होंने अपने पहले निर्देशक दिवंगत फिरोज खान को भी याद किया, जिन्हें आमतौर पर 'महिलाओं के पुरुष' के तौर पर जाना जाता था. उन्होंने ही सेलिना का सुनहरे पर्दे से सम्मानपूर्वक परिचय कराया था.

सेलिना के अनुसार, कई महिलाओं का पुरुष बनने में और एक कामुक व्यक्ति में बहुत बड़ा फर्क होता है. एफके एक सज्जन व्यक्ति थे, जिनकी जिंदगी में महिलाएं अपनी मर्जी से आती थीं और उन पर फिदा हो जाती थीं. उन्होंने कहा, "वह केवल पुरुषों में ही नहीं, बल्कि महिलाओं की तुलना में भी एक बेहतर इंसान थे. अगर उन्हें सेट पर यौन दुर्व्यवहार की जानकारी मिलती तो वह आरोपी को शूट कर देते. मैं खुशनसीब थी कि मुझे उनका नेतृत्व प्राप्त हुआ और इस बात की खुशी मुझे हमेशा रहेगी." सेलिना की यह सलाह है कि कार्यस्थल के माहौल में सुधार करने तथा यौन हिंसा के खात्मे के लिए वहां उदार नीति लागू करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि सिनेमा जगत के सलाहकारों को ऐसे लोगों की नियुक्ति करनी चाहिए, जो सेट के सारे सदस्यों को हर तरह की व्यावहारिक शिक्षा में पारंगत करें. यौन हिंसा जैसी समस्याओं की जड़ें काफी गहरी हैं, ऐसे में महिला और पुरुष दोनों को आपसी सहयोग से इसे रोकने की पहल करनी चाहिए. हालांकि इसमें जागरूकता और पारदर्शिता के माध्यम से ही कमी आएगी. सेलिना के अनुसार, तनुश्री दत्ता के मामले में सेट पर कई मापदंडों को दरकिनार किया गया था, जिस वजह से ऐसी परिस्थतियां उत्पन्न हुईं. उन्होंने कहा कि तनुश्री के साथ जो भी हुआ, वैसा नहीं होता, अगर निर्माताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के अधिकार के बाहर किसी ऐसे अंतरंग दृश्यों के पर्यवेक्षक की नियुक्ति की जाती. तब हालात शायद कुछ और होते.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 18, 2019 10:37 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).