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गोवा कोर्ट ने पत्नी से कथित जबरन संबंध बनाने के आरोपी पति को दी राहत, कहा- भारतीय कानून वैवाहिक दुष्कर्म को नहीं मानता अपराध

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO), पणजी की पीठासीन अधिकारी पूजा सी. कावलेकर ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत शादी के बाद दर्ज कराई गई. अदालत ने कहा कि विवाह के दौरान पति द्वारा पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना बनाए गए शारीरिक संबंधों को भारतीय कानून में दुष्कर्म नहीं माना जाता, क्योंकि भारतीय कानून वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध के रूप में मान्यता नहीं देता.

गोवा कोर्ट ने पत्नी से कथित जबरन संबंध बनाने के आरोपी पति को दी राहत, कहा- भारतीय कानून वैवाहिक दुष्कर्म को नहीं मानता अपराध

Goa Court Discharges Man Accused of Forcible Sex With Wife: गोवा की एक सेशन कोर्ट ने पत्नी के साथ कथित तौर पर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी 30 वर्षीय व्यक्ति को राहत देते हुए आरोपमुक्त (Discharge) कर दिया है. अदालत ने कहा कि भारतीय कानून में वैवाहिक दुष्कर्म (Marital Rape) को अपराध के रूप में मान्यता नहीं दी गई है. अदालत का यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें महिला ने आरोप लगाया था कि सिविल मैरिज की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरोपी ने उसकी सहमति के बिना कई बार शारीरिक संबंध बनाए.

क्या है पूरा मामला?

महिला के अनुसार, 13 जुलाई 2024 को सिविल मैरिज के पहले हस्ताक्षर (First Signature of Civil Marriage) के बाद दोनों के बीच पहली बार शारीरिक संबंध बने, जो उसकी इच्छा के विरुद्ध थे. इसके बावजूद उसने 7 अगस्त 2024 को आरोपी के साथ सिविल मैरिज कर ली. बाद में जब आरोपी ने धार्मिक रीति-रिवाजों से शादी करने से इनकार किया और विवाह रद्द करने की इच्छा जताई, तब महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

अदालत ने क्या कहा?

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO), पणजी की पीठासीन अधिकारी पूजा सी. कावलेकर ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत शादी के बाद दर्ज कराई गई. अदालत ने कहा कि विवाह के दौरान पति द्वारा पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना बनाए गए शारीरिक संबंधों को भारतीय कानून में दुष्कर्म नहीं माना जाता, क्योंकि भारतीय कानून वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध के रूप में मान्यता नहीं देता.

अदालत ने यह भी कहा कि यदि पति धार्मिक विवाह नहीं करना चाहता या पंजीकृत विवाह रद्द करना चाहता है, तो इसके नैतिक परिणाम हो सकते हैं, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे दुष्कर्म का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

अभियोजन पक्ष ने क्या दलील दी?

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि 13 जुलाई से 6 अगस्त 2024 के बीच आरोपी ने महिला की इच्छा के विरुद्ध कई बार शारीरिक संबंध बनाए और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी. अभियोजन का यह भी कहना था कि आरोपी ने विवाह का झांसा देकर महिला की सहमति हासिल की और बाद में धार्मिक विवाह से इनकार कर दिया.

कोर्ट ने किन धाराओं पर की टिप्पणी?

अदालत ने कहा कि पुलिस ने आरोपपत्र भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (दुष्कर्म) के तहत दाखिल किया था, जबकि शिकायत में मुख्य आरोप विवाह का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने का था, जिसके लिए धारा 69 अधिक उपयुक्त हो सकती थी.

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में धारा 69 के तहत भी अपराध नहीं बनता, क्योंकि आरोपी ने अंततः महिला से विधिवत विवाह कर लिया था. अदालत ने कहा कि यदि विवाह रद्द करने या वैवाहिक विवाद से संबंधित कोई शिकायत है, तो महिला इसके लिए सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है.

कोर्ट ने क्यों किया आरोपी को आरोपमुक्त?

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने जिन घटनाओं को जबरन शारीरिक संबंध बताया, उनके बावजूद उसने आरोपी से विवाह किया और उस दौरान किसी से शिकायत भी नहीं की. शिकायत तब दर्ज कराई गई, जब आरोपी ने पंजीकृत विवाह रद्द करने की इच्छा जताई. ऐसे में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर न तो BNS की धारा 64 और न ही धारा 69 के तहत अपराध बनता है. इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को आरोपमुक्त कर दिया.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 23, 2026 06:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).