नयी दिल्ली, दो मार्च भारत के चिड़ियाघरों में लगभग एक दशक पहले शुरू किए गए संरक्षण कार्यक्रमों के तहत लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन में ‘उल्लेखनीय’ प्रगति के बीच एक सरकारी समिति का कहना है कि क्रियान्वयन, वित्त पोषण और प्रजातियों के प्रबंधन में लगातार अंतराल उनकी समग्र सफलता में बाधा डालते हैं।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने देश भर के चिड़ियाघरों में संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों की स्थिति की समीक्षा और मूल्यांकन करने के लिए 2023 में एक समिति का गठन किया था।
वर्ष 2007 में, प्राधिकरण ने 43 चिड़ियाघरों में प्रजनन के लिए 74 प्रजातियों का चयन किया। 2014 तक, 26 उच्च प्राथमिकता वाली प्रजातियों का चयन किया गया और 23 के लिए प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया गया।
हाल में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को सौंपी गई समिति की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि भारत के चिड़ियाघरों ने ‘‘कई लुप्तप्राय प्रजातियों के आवास और प्रजनन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों की समग्र प्रभावशीलता लगातार आधारभूत और परिचालन चुनौतियों के कारण बाधित हो रही है।’’
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इन मुद्दों के समाधान के लिए न केवल अधिक वित्तपोषण आवंटन की आवश्यकता होगी, बल्कि व्यापक ढांचा तैयार करने, मानकीकृत प्रोटोकॉल को अपनाने तथा आनुवंशिक एवं जनसांख्यिकीय प्रबंधन व्यवस्था में सुधार की भी आवश्यकता होगी।’’
समिति ने कहा कि समय के साथ, सीजेडए के वित्त पोषण में कमी के चलते चिड़ियाघरों को अब सीमित वित्तीय सहायता मिलती है, मुख्य रूप से रखरखाव के लिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वित्तीय सहायता में इस कमी का इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन और स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।’’
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