तिरुवनंतपुरम, एक दिसंबर केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को कहा कि युवा उद्यमियों के लिए आयुष क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में स्टार्टअप शुरू करने की भारी संभावना और गुंजाइश है। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से इस क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
सोनोवाल तिरुवनंतपुरम के ‘ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम’ में पांच दिवसीय वैश्विक आयुर्वेद महोत्सव (जीएएफ 2023) के पांचवें संस्करण के हिस्से के रूप में आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेले का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे।
यह अब तक का सबसे बड़ा आयुर्वेद सम्मेलन है। यह आयोजन वर्ष में दो बार किया जाता है। इसका आयोजन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय, केरल सरकार और विभिन्न आयुर्वेद संघों के सहयोग से ‘सेंटर फॉर इनोवेशन इन साइंस एंड सोशल एक्शन’ (सीआईएसएसए) द्वारा आयोजित किया जाता है।
आयोजन का मुख्य विषय ‘‘स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती चुनौतियां और एक उभरता आयुर्वेद’’ है।
मंत्री ने कहा, ‘‘युवा उद्यमी अनूठा दवा विनिर्माण, आयुष उपकरण के विकास, स्वास्थ्य परीक्षण और उपकरणों के क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। विश्व आयुर्वेद दिवस पर, सरकार ने इस दिशा में हमारे युवा के लिए आयुष स्टार्टअप प्रतियोगिता की शुरुआत की है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार आयुष क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है और इसने पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग के लिए कई देशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा आयुष वीजा शुरू करने की घोषणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने औपचारिक रूप से इसे विदेशियों के लिए एक नई वीजा श्रेणी के रूप में पेश किया है और देश के आयुष अस्पतालों को विदेशी मरीजों को आकर्षित करने के लिए नए वीजा प्रावधान का लाभ उठाने के लिए खुद को पंजीकृत करना चाहिए।
जीएएफ 2023 के अध्यक्ष एवं केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने अपने भाषणा में कहा कि सभी गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) से संबंधित मौत के मामलों में 77 प्रतिशत मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज किये जाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भारत में एनसीडी का मानव प्रभाव 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर सबसे अधिक रहता है। इस संदर्भ में, भारतीय औषधि प्रणालियां, विशेष रूप से आयुर्वेद उभरती स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।’’
भारत से आयुष निर्यात का जिक्र करते हुए मुरलीधरन ने कहा कि यह 2014 में 1.09 अरब अमेरिकी डॉलर (9,000 करोड़ रुपये) से बढ़कर 2020 में 1.54 अरब डॉलर (13,000 करोड़ रुपये) हो गया है, जो आयुर्वेद पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है और दुनिया भर में गैर-संचारी तथा जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बढ़ते प्रसार को देखते हुए चिकित्सा के इस रूप में वैश्विक रुचि की पुष्टि करता है।
राष्ट्रीय आरोग्य मेला औषधीय पौधों की विविध शृंखला और आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपयोग का प्रदर्शन करेगा। सम्मेलन में देश के सभी प्रमुख आयुष संस्थानों ने अपने स्टॉल लगाए हैं।
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