हर दिन के हर घंटे ने उन शब्दों को सही साबित किया है। युद्ध छिड़ने की कगार पर भी जेलेंसकी अपील कर रहे थे। लेकिन 24 फरवरी, 2022 की तारीख यूक्रेन के लिए प्रलयकारी, रूस के लिए राह बदलने वाली और दुनिया के लिए इतिहास को आकार देने वाली रही।
शुक्रवार को आने वाली आक्रमण की पहली वर्षगांठ भयानक और परेशान करने वाली है। यह रूस और यूक्रेन की सीमाओं से परे भी हत्या, विनाश, नुकसान और दर्द का एक पूरा वर्ष चिह्नित करती है।
युद्ध से जुड़े मूल्य संबंधी झटके तो सिर्फ एक उदाहरण हैं। लेकिन सवाल उठता है कि यह कब तक रुकेगा? लेकिन यह सवाल असंतोषजनक है क्योंकि इस बिंदु पर अभी इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता।
साल के सभी 365 दिन हुए रक्तपात की पीड़ा और इसके वैश्विक असर को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
शीत युद्ध के बाद से रूस किसी भी समय की तुलना में अधिक अलग-थलग है। पश्चिमी देश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पराजय के लिए एकजुट हो रहे हैं और यह भी दांव खेल रहे हैं कि पूर्व-केजीबी जासूस परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
चीन सबक ले रहा है जिसका इस्तेमाल ताइवान के खिलाफ किया जा सकता है।
रूस के हजारों लोग युद्ध से बचने के लिए विदेश के लिए पलायन कर चुके हैं, लाखों यूक्रेनी बेघर हो गये हैं, सैकड़ों अरब डॉलर हथियार जुटाने के लिए झोंक दिये गये जिसने युद्ध को सर्वाधिक घातक बना दिया।
इस युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई हजार अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। इस युद्ध के कारण अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और इस संख्या का बढ़ना जारी है।
यूक्रेन अब भी यहां मौजूद है। यह क्रेमलिन के लिए चुभने वाली हार है। ऐसा लगता है कि पुतिन ने सोचा था कि अब तक उनकी सेना और खुफिया एजेंसी यूक्रेन को एक कठपुतली राज्य के रूप में तब्दील कर देगी।
लेकिन इसकी बजाय एक आजाद देश के रूप में अस्तित्व मिटने के खतरे ने यूक्रेन को यूरोपीय संघ के इतना करीब ला दिया है, जितना वह पहले कभी नहीं था और इस स्थिति से पुतिन बचना चाहते थे।
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