विदेश की खबरें | क्या एआई चिकित्सकों के ‘अंतर्ज्ञान’ का स्थान लेगा?
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मेलबर्न, 18 दिसंबर (360इंफो) प्रभावी नैदानिक देखभाल में स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के अंतर्ज्ञान (इन्टूशन) को दुनियाभर में कई रिपोर्टों में बार-बार सत्यापित किया गया है।

गंभीर रूप से बीमार बच्चों में सेप्सिस का पता लगाने की डॉक्टरों की क्षमता से लेकर मरीज की हालत खराब होने के ‘महत्वपूर्ण संकेत’ के रूप में ‘नर्स की चिंता’ तक अंतर्ज्ञान उच्च जोखिम वाले मरीजों की मदद करने में एक बड़ी भूमिका निभाता प्रतीत होता है जबकि डेटा या कम्प्यूटर से मिली जानकारी इलाज का दूसरा तरीका अपनाने का सुझाव देते हैं।

कृत्रिम मेधा (एआई) ने पहले ही स्वास्थ्य देखभाल में बदलाव लाना शुरू कर दिया है और स्वास्थ्य क्षेत्र 2024 और उसके बाद भी एआई नवाचार पर विचार करना जारी रखेगा।

तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में यह सवाल खड़े होते हैं कि स्वास्थ्य देखभाल में इन मानवीय अनुमानों की क्या भूमिका होगी और क्या एआई डॉक्टरों की ‘अंत: भावना’ से आगे निकलने वाला है।

स्वास्थ्य देखभाल में एआई क्या है और कब इसका इस्तेमाल किया जाता है?

बैबसन कॉलेज के थॉमस डेवनपोर्ट और डेलॉयट परामर्शक रवि कलाकोटा ने बताया है कि एआई स्वास्थ्य देखभाल में ‘नियम आधारित विशेष प्रणालियां’ शामिल हैं जो किसी समस्या का समाधान करने के लिए निर्धारित ज्ञान आधारित नियमों और ‘रोबोटिक प्रक्रिया ऑटोमेशन’ का इस्तेमाल करती है।

स्वास्थ्य देखभाल में इस्तेमाल किए जाने वाले एआई के अन्य रूपों में रोबोट, प्राकृतिक संसाधन और मशीन लर्निंग शामिल हैं।

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