चेन्नई, तीन अगस्त मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को आश्चर्य जताया कि तमिलनाडु सरकार से राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी ए.जी. पेरारीवलन की पैरोल अर्जी का तीखा विरोध क्यों कर रही है जबकि मंत्रिमंडल ने मामले के सभी सात दोषियों को रिहा करने की सिफारिश कर चुका है।
न्यायमूर्ति एन. किरुबाकरण और न्यायमूर्ति वी.एम. वेलुमणि की खंड पीठ ने सरकारी वकील ए. नटराजन से कहा, ‘‘आपके मंत्रिमंडल ने पूरी तरह से उसकी रिहाई की सिफारिश की है। फिर आप उनके एक महीने की पैरोल अर्जी का विरोध क्यों कर रहे हैं। सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध ना करें।’’
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नटराजन ने कहा कि वह सिर्फ विरोध करने के लक्ष्य से ऐसा नहीं कर रहे हैं, बल्कि आवेदक के पास पैरोल के लिए कोई वैध कारण होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘वह पिछले साल भी बाहर निकले थे। जेल के नियमों के अनुसार, एक कैदी तीन साल के बाद ही अगला पैरोल पाने का पात्र बनता है।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा जेल के डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट लिखा है कि हालांकि कैदी को कई बीमारियां हुईं, लेकिन फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है।’’
पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई 12 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।
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