बेंगलुरु, सात दिसंबर ऐसे में जब कर्नाटक भीषण सूखे से जूझ रहा है राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल किया कि उन्होंने राज्य के किसानों के लिए उसी तरह की चिंता क्यों नहीं दिखायी, जिस तरह वह मुश्किल समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद के लिए तत्परता दिखाते हैं।
मीडिया की उन खबरों का हवाला देते हुए जिसमें कहा गया है कि भारत ने ज्वालामुखी विस्फोट के बाद पापुआ न्यू गिनी को 10 लाख अमरीकी डालर की सहायता और केन्या को कृषि को उन्नत करने के लिए 25 करोड़ अमरीकी डालर की ऋण सुविधा की घोषणा की, सिद्धरमैया ने कहा कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति पर प्रधानमंत्री की चुप्पी चिंता उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में सभी राज्यों और उनके नागरिकों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जाता।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमें नरेन्द्र मोदी द्वारा अन्य देशों को मदद देने से कोई विरोध नहीं है, वह केवल भारत की सहायता कूटनीति और ‘सॉफ्ट पावर’ कूटनीति की विरासत को कायम रख रहे हैं, जो एक ऐसी प्रथा है जो स्वतंत्रता-पूर्व युग से चली आ रही है और तब से जारी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हमारा सवाल यह है: मोदी सूखे के कारण फसल के नुकसान का सामना करने वाले हमारे किसानों के लिए समान स्तर की चिंता क्यों नहीं दिखाते हैं? कन्नड़ लोग मुआवजे की मांग वाले अपने पत्र पर केंद्रीय भाजपा सरकार से जवाब के हकदार क्यों नहीं हैं?’’
सिद्धरमैया ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य के किसानों को राहत देने के लिए अभी तक प्रारंभिक बैठक भी नहीं बुलाई है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, राज्य द्वारा आपातकालीन उपाय किए गए हैं और पहले चरण में पात्र किसानों को दो-दो हजार रुपये तक की फसल राहत निधि जारी की गई है।
सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि हालांकि राज्य के तीन मंत्री दिल्ली गए, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि राहत के लिए 18,171 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का अनुरोध करते हुए केंद्र को पत्र लिखा गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्र कर्नाटक के कर के पैसे का हिस्सा जारी कर दे, तो इससे राज्य के किसानों की पीड़ा कम करने में मदद मिलेगी। उनके मुताबिक, 48.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेतों को नुकसान हुआ है और राज्य ने केंद्र से 4663 करोड़ रुपये का फसल क्षति मुआवजा मांगा था। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक पत्र लिखकर केंद्रीय कृषि और आवास मंत्रियों से सीधी मुलाकात का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने हमें अभी तक समय नहीं दिया है।''
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