देश की खबरें | जब येचुरी ने छात्रों का नेतृत्व करते हुए जेएनयू की कुलाधिपति के पद से इंदिरा गांधी से इस्तीफा मांगा

नयी दिल्ली, 12 सितंबर आपातकाल के दौरान राजनीति में एक अलग पहचान हासिल करने वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी पढ़ाई में बहुत अच्छे थे और सीबीएसई के टॉपर भी थे, लेकिन उन्हें उस वक्त बड़ी उपलब्धि हासिल हुई जब उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों का नेतृत्व करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया।

येचुरी अक्टूबर, 1977 में छात्रों के एक समूह के साथ इंदिरा गांधी के आवास पर गये और उन्हें जेएनयू के कुलाधिपति पद से इस्तीफे की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।

एक बार इस घटना को याद करते हुए येचुरी ने कहा था कि आपातकाल के दिनों में छात्रों की गिरफ्तारी के नोटिस विश्वविद्यालय में उनके छात्रावास के दरवाजों पर चिपका दिए जाते थे।

विश्वविद्यालय में इंदिरा गांधी के कुलाधिपति पद से इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया और छात्रों ने उनके आवास तक पैदल मार्च कर उनके दरवाजे पर इस्तीफे की मांग करते हुए एक ज्ञापन चिपकाने का निर्णय लिया।

इंदिरा गांधी के आवास पर पहुंचने पर उनसे पांच छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल अंदर भेजने को कहा गया। छात्रों ने हालांकि कहा कि उन सभी को अंदर जाने दिया जाना चाहिए और उनकी इस बात को मान लिया गया।

जब छात्र इंदिरा गांधी के आवास के अंदर पहुंचे तो वे यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद उनसे मिलने आई थीं।

येचुरी ने घटना को याद करते हुए कहा था, ‘‘उन्होंने हमसे पूछा कि हम क्या चाहते हैं और हमने कहा कि हम चाहते हैं कि वह इस्तीफा दे दें।’’

इंदिरा गांधी को घेरे हुए जेएनयू के छात्रों और ज्ञापन पढ़ते हुए युवा येचुरी की तस्वीर इतिहास का हिस्सा बन गई है।

येचुरी एक प्रतिभाशाली छात्र थे, जिन्होंने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया था तथा अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों ही डिग्री में प्रथम श्रेणी प्राप्त की थी।

वह 1974 में जेएनयू में छात्र आंदोलन में शामिल हुए और ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) के नेता बन गए। दो साल के भीतर वह तीन बार जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष चुने गए।

येचुरी 1975 में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गए और आपातकाल के दौरान उनकी राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वह 1984 से 1986 तक एसएफआई के अध्यक्ष रहे और छात्र संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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