देश की खबरें | टीवी पर प्रसारित समाचार से होने वाली क्षति से पहले उसकी जांच के लिए क्या व्यवस्था है: अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि समाचार चैनलों द्वारा प्रसारित की गई किसी विषयवस्तु से “होने वाली क्षति” से पहले क्या उसकी जांच का कोई तरीका उपलब्ध है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, 16 अक्टूबर बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि समाचार चैनलों द्वारा प्रसारित की गई किसी विषयवस्तु से “होने वाली क्षति” से पहले क्या उसकी जांच का कोई तरीका उपलब्ध है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की कवरेज संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि अगर मीडिया सीमारेखा लांघता है तो इसके लिए विधायिका को कार्रवाई करनी चाहिए।

यह भी पढ़े | Bihar Assembly Election 2020: चिराग पासवान बोले- मेरे दिल में हैं PM मोदी, मैं हूं उनका हनुमान, सीना चीर कर दिखा सकता हूं.

अदालत ने कहा, “ऐसे मामले से जहां मीडिया ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघता है, वहां संसद को हस्तक्षेप करना चाहिए। इसमें अदालत दखलंदाजी क्यों करे?”

कई पूर्व पुलिस अधिकारियों की और से दायर याचिका में कहा गया कि राजपूत के मामले में “मीडिया ट्रायल” चल रहा है और इसे बंद करना चाहिए।

यह भी पढ़े | दिल्ली: एंटी डस्ट अभियान के तहत पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने किराड़ी और बाबा विद्यापति मार्ग में सरप्राइज विजिट किया: 16 अक्टूबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा, “कुछ गलत होने पर किसी भी लोक सेवक को हटाया जा सकता है। निजी कर्मचारियों पर भी यही लागू होता है। उचित आचरण न करने पर लोगों पर कार्रवाई की जाती है।”

पीठ ने कहा, “प्रिंट मीडिया पर लगाम के लिए आपके पास व्यवस्था है। ऐसा ही आप इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ नहीं करते।”

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार सरकार को प्रेस की स्वंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और प्रेस को नियमन के लिए खुद प्रयास करना चाहिए।

इस पर अदालत ने कहा कि सिंह जिन आदेशों का हवाला दे रहे हैं वह पुराने हैं।

अदालत ने कहा, “यह आदेश 2012-13 के हैं और अब समय बदल गया है। आज स्वतंत्रता का अत्यधिक दुरुपयोग किया जा रहा है।”

पीठ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की हालिया टिप्पणी का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि समाचार चैनलों के नियमन के लिए वर्तमान में जो व्यवस्था है उसके प्रभावी होने पर अदालत को चिंता है।

न्यायाधीशों ने कहा, “ऐसा लगता है कि हर व्यक्ति जो कहना चाहता है उसे वह कहने का निरंकुश लाइसेंस मिला हुआ है। कथित तौर पर जो क्षति होती है, उसे रोकने के लिए क्या कोई व्यवस्था है? या आप तभी कार्रवाई करते हैं जब कोई समाचार प्रसारित हो जाता है और शिकायतें आने लगती हैं?”

अदालत ने कहा कि मीडिया को यह ध्यान में रखना चाहिए कि किसी व्यक्ति की छवि खराब न हो।

एएसजी सिंह ने कहा कि सरकार का भी यही मत है और जो कुछ भी हो सकता है उस पर सरकार विचार कर रही है।

मामले की सुनवाई सोमवार को जारी रहेगी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

India vs Zimbabwe, T20 World Cup 2026 48th Match Scorecard: चेन्नई में टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 72 रनों से दी करारी शिकस्त, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार; यहां देखें IND बनाम ZIM मैच का स्कोरकार्ड

Australia Women vs India Women, 2nd ODI Key Players To Watch Out: ऑस्ट्रेलिया महिला बनाम भारत महिला के बीच दूसरे वनडे में इन स्टार खिलाड़ियों पर होगी सबकी निगाहें

Australia Women vs India Women, 2nd ODI Pitch Report: दूसरे वनडे में भारत महिला के बल्लेबाज दिखाएंगे दम या ऑस्ट्रेलिया महिला के गेंदबाज करेंगे कमाल? यहां जानें पिच रिपोर्ट

India vs Zimbabwe, T20 World Cup 2026 48th Match Scorecard: चेन्नई में टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे के सामने रखा 257 रनों का टारगेट, अभिषेक शर्मा ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

\