मुंबई, 16 अगस्त कम निर्यात के कारण इस वित्त वर्ष में जूट उद्योग के राजस्व में 5-6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह जानकारी दी गई।
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, जूट उद्योग के राजस्व में गिरावट का यह लगातार दूसरा वर्ष होगा। हालांकि, घरेलू मांग स्थिर रहने की उम्मीद है।
रेटिंग एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा कि निर्यात क्षेत्र के 12,000 करोड़ रुपये के राजस्व का एक तिहाई है। लेकिन पिछले वित्त वर्ष में निर्यात में आठ प्रतिशत की गिरावट के बाद, इस वित्त वर्ष में 15 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। इसका कारण अमेरिका और यूरोप में नरमी की चिंताओं के बीच विदेशी साझेदार स्टॉक खत्म करने में लगे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर विदेशी मांग से इस वित्त वर्ष में देश में जूट उद्योग के राजस्व में 5-6 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
इसमें कहा गया है कि अमेरिका और यूरोप प्रमुख निर्यात बाजार हैं, जो भारत से कुल जूट निर्यात में 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं। इन बाजारों में जूट का अंतिम उपयोग काफी हद तक सोच विचार कर किया जाने वाला व्यय है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा अधिक अनाज खरीद के कारण भंडारण और परिवहन बैग (जूट से बने) के लिए लगातार ऑर्डर के कारण घरेलू मांग स्थिर रहने की उम्मीद है।
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार इस क्षेत्र के राजस्व में शेष दो-तिहाई हिस्सा घरेलू बाजार का है और यह सरकार की मांग पर निर्भर करता है। क्योंकि वह उत्पादित जूट का लगभग 80 प्रतिशत नोडल एजेंसियों के माध्यम से खरीदती है।
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