मुंबई, 11 सितंबर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार मराठों को न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है और समुदाय के छात्रों का कोटा बहाल करने के लिए अध्यादेश जारी करने के विकल्प पर भी चर्चा हुई है।
उच्चतम न्यायालय ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने संबंधी 2018 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून के क्रियान्वयन पर बुधवार को रोक लगा दी और इसे चुनौती देने वाली याचिका को बड़ी संविधान पीठ के पास भेज दिया।
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मराठा संगठनों के प्रतिनिधियों और आरक्षण पर मंत्रिमंडल की उपसमिति के साथ बैठक में ठाकरे ने सभी पक्षों से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने और समुदाय के सदस्यों को भड़काने से बचने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने राकांपा प्रमुख शरद पवार से बातचीत कर छात्रपति साहू महाराज अनुसंधान प्रशिक्षण और मानव विकास संस्थान (सारथी) के माध्यम से या अध्यादेश जारी कर मराठा छात्रों की मदद करने की संभावना के संबंध में चर्चा की है।
सारथी की स्थापना मराठाओं के सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए अनुसंधान, नीतिगत वकालत तथा प्रशिक्षण के लिए की गयी।
उन्होंने कहा, ‘‘सभी को विश्वास में लेकर, मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए जो भी आवश्यक होगा हम करेंगे। बातचीत में विपक्ष के नेताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा।’’
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई इस बैठक में कानून विशेषज्ञ और मराठा मुद्दे से जुड़े शोध कर्ता भी मौजूद थे।
ठाकरे ने कहा कि मराठा कोटा विधेयक को राज्य विधानमंडल ने आम सहमति से पारित किया और बंबई उच्च न्यायालय ने इसे बरकरार रखा।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय में सरकार की ओर से पेश हो रही कानूनी टीम को पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने नियुक्त किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले का हल निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैठक में शामिल हुए मराठा संगठनों ने राज्य सरकार के प्रयासों का समर्थन किया।
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