पुणे, 10 जुलाई महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री और अजित पवार गुट के नेता छगन भुजबल ने सोमवार को कहा कि भले ही उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा से गठबंधन किया हो, लेकिन अपनी ‘विचारधारा’ नहीं छोड़ी है।
उन्होंने कई मौकों पर भाजपा के साथ हाथ मिलाने के बाद अपना रुख बदलने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक शरद पवार की आलोचना की।
भुजबल ने दावा किया कि राकांपा के 53 में से 45 विधायक अजित पवार के साथ हैं।
उन्होंने कहा, "मैं बाहर रहकर क्या करता।"
भुजबल ने पुणे में पत्रकारों से कहा कि शरद पवार ने 2014 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय मुझे आश्चर्य हुआ और कहा कि हम विपक्ष में हैं। 2017 में भी, जब मैं जेल में था, तब राकांपा के पांच नेताओं और भाजपा के पांच नेताओं ने राकांपा को सरकार में शामिल करने के बारे में चर्चा की थी। उस समय, भाजपा से कहा गया था कि वह भाजपा-राकांपा सरकार का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अपनी सहयोगी शिवसेना को छोड़ दे। तब भी वह (शरद पवार) पीछे हट गए।”
भुजबल और अजित पवार समेत राकांपा के नौ विधायक दो जुलाई को एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अपनी विचारधारा बदल ली है और अब वह महात्मा फुले जैसे समाज सुधारकों के अनुयायी होने के बजाय हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ जुड़ गए हैं। इस पर भुजबल ने स्पष्ट किया, "हमने भाजपा में विलय नहीं किया है। नीतीश कुमार (बिहार के मुख्यमंत्री) उनके साथ थे, वह चले गए। ..ममता बनर्जी(भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में) थीं, वह बाहर आ गईं। हमने उनके साथ गठबंधन किया है, लेकिन अपनी विचारधारा नहीं छोड़ी है।''
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