थकान, सांस फूलना और बालों का झड़ना केवल तनाव नहीं, बल्कि फेरिटिन की कमी के लक्षण हो सकते हैं. अक्सर हम खून की कमी को सिर्फ हीमोग्लोबिन से मापते हैं, लेकिन असली राज 'फेरिटिन' में छिपा है.जर्मनी में रहने वाली राधिका बताती हैं, "कुछ साल पहले अचानक मुझे महसूस हुआ की सीढ़ियां चढ़ने में मेरी सांस फूल रही थी. बैठे बैठे मेरे दिल की धड़कन तेज हो रही थी और हाथ पैर ठंडे और सुन्न हो रहे थे. हर वक्त थकान का एहसास और चिड़चिड़ापन होता था."
इन लक्षणों की वजह से राधिका ने डॉक्टर के पास जाने का फैसला किया. डॉक्टर ने उनके खून में हीमोग्लोबिन की जांच की और पाया कि उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी है. इसके बाद डॉक्टर ने फेरिटिन की जांच करवाने का निर्देश दिया. जांच में सामने आया कि उनका फेरिटिन न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका था. इसका मतलब यह होता कि शरीर में आयरन को जमा करके रखने वाला बैंक यानी फेरिटिन खत्म होने की कगार पर था. फेरिटिन की कमी के कारण ही राधिका के शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बन पा रहा था.
चूंकि राधिका का हीमोग्लोबिन और फेरिटिन काफी काम था, डॉक्टर ने उन्हें उच्च मात्रा में फेरिटिन का इंट्रावीनस ट्रांसफ्यूजन देने का निर्णय लिया. इससे फेरिटिन के स्तर को तेजी से बढ़ाने में मदद मिली और जल्द ही उनके लक्षणों में सुधार भी हुए. उनके डॉक्टर ने उन्हें सलाह दी कि आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया को रोकने के लिए हर तीन महीने में उन्हें अपने फेरिटिन स्तर की जांच करवानी होगी.
क्या है फेरिटिन?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की दिशानिर्देश के अनुसार फेरिटिन एक ऐसा महत्वपूर्ण प्रोटीन है जिसे हम शरीर का 'आयरन बैंक' भी कह सकते है. इसका काम है शरीर में आयरन को स्टोर करना और जब शरीर को हीमोग्लोबिन बनाने की जरूरत पड़े, तो उस आयरन को नियंत्रित ढंग से मुक्त करना. शरीर में फेरिटिन की कम मात्रा आयरन की कमी का संकेत देती है, जबकि फेरिटिन की ज्यादा मात्रा आयरन की अधिकता (आयरन ओवरलोड) का संकेत देती है.
इसे टिफिन बॉक्स के उदाहरण से समझा जा सकता है. कल्पना कीजिए कि आपका खाना, आयरन है और फेरिटिन उस खाने को संभालने वाला टिफिन बॉक्स. अगर हम भूखे हैं और टिफिन बॉक्स में खाना खत्म हो गया है, तो खाना न मिलने की वजह से हम थकान और कमजोरी महसूस करने लगते हैं. शरीर में फेरिटिन भी इसी लंच बॉक्स की तरह काम करता है.
फेरिटिन की कमी के लक्षण
अमेरिकन सोसाइटी ऑफ हीमैटोलॉजी के मुताबिक, जब शरीर में फेरिटिन का स्तर कम हो, तो यह संकेत है कि शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन नहीं बचा है. इस स्थिति में कई बार एनीमिया विकसित होने से पहले ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
डॉक्टर श्लानी समर्पिता नवी मुंबई के तेर्ना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कार्यरत हैं. उनके मुताबिक महिलाओं में अक्सर फेरिटिन की कमी देखी जाती है क्यों पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान उनके शरीर में आयरन की ज्यादा जरूरत होती है. इस वजह से महिलाओं के शरीर में आयरन के भंडार तेजी से खत्म होते हैं और उनमें बहुत ज्यादा थकान, बालों का झड़ना, दिल की धड़कन तेज होना, तनाव, ब्रेन फॉग के साथ ही अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का न आने जैसे लक्षण दिखने लगते हैं.
डॉक्टर श्लानी यह भी बताती हैं कि जहां महिलाओं में फेरिटिन की कमी आम बात है, वहीं पुरुषों में आमतौर पर यह कमी नहीं होती है. अगर किसी पुरुष में फेरिटिन की कमी पाई जाती है, तो यह ज्यादातर किसी अन्य अंदरूनी समस्या की ओर इशारा करता है. कमी का कारण पता लगाने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरुरी है. फेरिटिन की कमी के लक्षण पुरुषों में भी थकान, सुस्ती, सांस का फूलना, चक्कर आना और कमजोरी के रूप में सामने आते हैं.
वहीं बच्चों में थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना या नाखून कमजोर होना फेरिटिन की कमी के लक्षणों में शामिल है. डॉक्टर श्लानी बताती हैं, "बच्चों में फेरिटिन की कमी की पुष्टि होने पर हम उन्हें आयरन सप्लिमेंट्स के साथ ही हर छह महीने पर डीवरमिंग (पेट के कीड़े मारने की प्रक्रिया) करने की सलाह देते हैं."
कितनी आम है फेरिटिन की समस्या और किससे मिलेगी मदद
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में 33 फीसदी महिलाएं, 40 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 42 फीसदी बच्चे आयरन की कमी से प्रभावित होते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर में आयरन का स्तर बताने वाली फेरिटिन की जांच से एनीमिया से बचाव की योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. गर्भवती महिलाओं में इसकी कमी के कारण जन्म के समय बच्चे का वजन कम रह सकता है या फिर समय से पहले बच्चे की डिलीवरी भी हो सकती है.
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 15-49 वर्ष की लगभग 57.2 फीसदी महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं. इसी तरह, 6-59 महीने के लगभग 53.1 फीसदी बच्चे भी इससे प्रभावित हैं. डॉक्टर श्लानी बताती हैं कि भारत में आमतौर पर जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं या होने की कोशिश कर रही हैं, उनकी फेरिटिन की जांच भी नियमित रूप से की जाती है.
डॉक्टर जयन बरई जर्मनी के ट्रोसडॉर्फ के सेंट जोसेफ अस्पताल में कार्यरत हैं. उनका कहना है कि "फेरिटिन की जांच के लिए हम आमतौर पर ‘फेरिटिन ब्लड टेस्ट‘ करते हैं. अगर इसमें फेरिटिन की मात्रा कम हो, तो हम मरीज को मात्रा की कमी के आधार पर करीब छह महीने से एक साल तक आयरन सप्लीमेंट्स देते हैं.” वह बताते हैं कि लक्षण दिखाई देने पर पहले ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है और किसी को खुद से दवा लेना नहीं शुरू करना चाहिए. डॉक्टर बरई के मुताबिक, "आयरन-युक्त आहार के साथ विटामिन-सी से भरपूर चीजें खाने से बहुत फायदा होता है. वहीं, दूध या डेयरी के कारण शरीर को आयरन सोखने में दिक्कत आती है, इसलिए आयरन-युक्त भोजन के साथ डेयरी प्रोडक्ट नहीं लेना चाहिए.”













QuickLY