देश की खबरें | जल प्रकृति की अमूल्य सम्पदा है,हमें इसके संरक्षण की भी चिन्ता करनी होगी : योगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि जल प्रकृति की अमूल्य सम्पदा है और हमें इसके संरक्षण की भी चिन्ता करनी होगी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

लखनऊ, 22 जुलाई उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि जल प्रकृति की अमूल्य सम्पदा है और हमें इसके संरक्षण की भी चिन्ता करनी होगी।

उन्होंने कहा कि जब हम दुनिया के परिप्रेक्ष्य में भूजल की बात करते हैं तो उत्तर प्रदेश इस दृष्टि से अत्यन्त समृद्धशाली राज्य है।

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मुख्यमंत्री बुधवार को ‘भूजल सप्ताह’ के समापन कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग ने ‘भूजल सप्ताह’ का आयोजन करके जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का जो व्यापक और अभिनव कार्य किया है, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार दशकों के दौरान अत्यधिक मात्रा में भूजल दोहन के कारण प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में व्यापक विषमता देखने को मिली है। प्रदेश के 823 विकास खण्डों में से 287 विकास खण्डों में भूजल में 20 सेंटीमीटर तक की गिरावट प्रतिवर्ष देखने को मिली है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही है। साथ ही, जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भूजल के संरक्षण हेतु आमजन की सहभागिता अत्यन्त आवश्यक है। यह भी आवश्यक है कि जनसामान्य को भूजल के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। इस उद्देश्य से पूरे प्रदेश में 16 जुलाई से 22 जुलाई, 2020 तक ‘भूजल सप्ताह’ का आयोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में वर्तमान सरकार के प्रयासों से भूजल के प्रति गम्भीरता से कार्य किया गया है। परिणामस्वरूप तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार, चेकडैम का निर्माण, सिंचाई में कम जल की खपत वाली विधियों जैसे ड्रिप व स्प्रिंक्लर प्रणाली को प्रोत्साहित करने का कार्य किया गया है, जिसके सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में चरणबद्ध रूप से रिवर बेसिन को चिन्हित करते हुए भूजल गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाना है और इसके बाद प्रदेश के समस्त रिवर बेसिन की गुणवत्ता का समग्र आकलन किया जा सकेगा।

उन्होंने लोगों से अपील की है कि लोग अपने भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रबन्ध करें, जिससे पूरे प्रदेश में भूजल समस्या का दीर्घकालीन समाधान हो सके।

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