विदेश की खबरें | ‘वैग्नर ग्रुप’ के लड़ाके मॉस्को की तरफ बढ़े, पुतिन ने बगावत करने वालों को कठोर सजा की चेतावनी दी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

प्रीगोझिन के लड़ाके यूक्रेन की सीमा पार कर रूस के दक्षिण में महत्वपूर्ण शहर में दाखिल हुए और मॉस्को की तरफ बढ़ रहे हैं।

टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में पुतिन ने रूस की रक्षा करने का संकल्प लिया। प्रीगोझिन की इस बगावत को सत्ता में दो दशकों से अधिक समय में पुतिन के नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया जा रहा है।

प्रीगोझिन की सेना के राजधानी की ओर बढ़ने के बीच मॉस्को के कई हिस्सों में सैन्य ट्रक और बख्तरबंद वाहन देखे गए। इसके दक्षिणी हिस्से में सैनिकों ने चौकियां बनाईं, रेत की बोरियां लगाने के साथ मशीनगन तैनात कर दी हैं।

अधिकारियों ने मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्रों में ‘आतंकवाद विरोधी शासन’ लागू करने की घोषणा की है, जिसके तहत वहां नागरिकों को हासिल कई अधिकारों को सीमित कर दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। मॉस्को के मेयर ने आगाह किया है कि ‘वैग्नर ग्रुप’ की बगावत के कारण कड़ी सुरक्षा के तहत रूस की राजधानी के कुछ हिस्सों में यातायात प्रतिबंधित किया जा सकता है।

मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने शहर के निवासियों से मॉस्को और आसपास के क्षेत्र में आतंकवाद रोधी अभियान के बीच अपने वाहनों का इस्तेमाल करने से परहेज करने को कहा। उन्होंने लोक सेवकों और कुछ औद्योगिक उद्यमों के कर्मचारियों को छोड़कर अधिकांश लोगों के लिए सोमवार को गैर-कामकाजी दिन घोषित किया।

प्रीगोझिन की सेना को आगे बढ़ने से रोकने के लिए राजमार्गों के कुछ हिस्सों को भी खोद डाला गया। रेड स्क्वायर तक पहुंच बंद कर दी गई, दो प्रमुख संग्रहालय खाली करा लिए गए और एक पार्क बंद कर दिया गया। सोबयानिन ने कहा कि शहर की सभी प्रमुख सेवाओं को पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है और निवासियों को किसी भी आपात स्थिति की सूचना देने की सलाह दी गई है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा है कि प्रीगोझिन के नेतृत्व वाली निजी सेना मॉस्को से करीब 1,000 किलोमीटर से अधिक दूर दक्षिण में रोस्तोव-ओन-दोन शहर पहुंच चुकी है। इस शहर से रूस यूक्रेन में अपने सैन्य अभियान को संचालित कर रहा है।

‘वैग्नर ग्रुप’ के लड़ाके अपने सैन्य साजो-सामान के साथ रूस के लिपेत्सक प्रांत में भी दाखिल हो चुके हैं जो मॉस्को के दक्षिण में 360 की दूरी पर स्थित है। क्षेत्रीय गवर्नर अर्तामोनोव ने टेलीग्राम पर कहा कि बाशिंदों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं।

यूक्रेन पर रूस के हमले के ठीक 16 महीने बाद यह नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे बड़े संघर्ष में हजारों लोग मारे गए, लाखों लोग विस्थापित हुए और कई शहर मलबे में तब्दील हो गए।

यूक्रेन को उम्मीद है रूस की अंदरूनी लड़ाई से उसकी सेना के लिए रूसी सेना द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्र को वापस लेने के अवसर पैदा होंगे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि मॉस्को पूरी तरह कमजोर हो चुका है और कीव यूरोप को ‘‘रूस की बुराइयों और अराजकता के फैलने’’ से बचा रहा है।

अपने संबोधन में, पुतिन ने प्रीगोझिन का नाम लिए बिना उसके विद्रोह को, ‘‘विश्वासघात’’ और ‘‘देशद्रोह’’ करार दिया। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘विद्रोह की साजिश रचने वाले सभी लोगों को कठोर सजा भुगतनी होगी। सशस्त्र बलों और अन्य सरकारी एजेंसियों को आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं।’’

प्रीगोझिन ने कहा कि उनके लड़ाके आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, क्योंकि ‘‘हम नहीं चाहते कि देश भ्रष्टाचार, धोखा और नौकरशाही के चंगुल में फंसा रहे।’’ प्रीगोझिन ने कहा, ‘‘जहां तक मातृभूमि से विश्वासघात की बात है, तो राष्ट्रपति गलत समझ रहे हैं। हम अपनी मातृभूमि के देशभक्त हैं।’’

प्रीगोझिन के लड़ाके यूक्रेन में रूसी सैनिकों के साथ मिलकर लड़ रहे हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि उनके कदम का उद्देश्य क्या है, लेकिन विद्रोह रूसी सैन्य नेताओं के साथ प्रीगोझिन के टकराव बढ़ने का संकेत है, जिन पर उन्होंने यूक्रेन में युद्ध को विफल करने और क्षेत्र में अपनी सेना को कमजोर करने का आरोप लगाया है। प्रीगोझिन ने कहा, ‘‘यह कोई सैन्य तख्तापलट नहीं है, बल्कि न्याय के लिये अभियान है।’’

प्रीगोझिन ने कहा कि उनकी कमान में 25,000 सैनिक हैं और उन्होंने रूसी सेना से प्रतिरोध न करने का आग्रह किया। प्रीगोझिन ने रोस्तोव-ओन-दोन में सैन्य मुख्यालय में अपना वीडियो पोस्ट किया और दावा किया कि उनकी सेना ने शहर में हवाई क्षेत्र और अन्य सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण बना लिया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कुछ वीडियो में टैंक सहित सैन्य वाहन सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं।

टेलीग्राम पर अपने कई संदेशों में से एक में प्रीगोझिन ने कहा, ‘‘हमने अपने रास्ते में एक भी व्यक्ति को नहीं मारा।’’ प्रीगोझिन ने यह भी कहा कि उनकी सेना ने ‘‘बंदूक की एक भी गोली चलाए बिना’’ सैन्य मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। रूसी अधिकारियों ने भी अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी है।

पुतिन ने विद्रोह की निंदा की, जो ऐसे समय में हुआ है, जब रूस ‘‘अपने भविष्य के लिए सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है’’ क्योंकि पश्चिमी देशों की सरकारें मॉस्को पर प्रतिबंध लगा रही हैं और यूक्रेन को हथियार दे रही हैं। पुतिन ने आरोप लगाया, ‘‘पश्चिमी देशों का पूरा सैन्य, आर्थिक और सूचना तंत्र हमारे खिलाफ खड़ा कर दिया गया है।’’

सशस्त्र विद्रोह की घोषणा के बाद, संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) समेत रूस की सुरक्षा सेवाएं प्रीगोझिन की गिरफ्तारी के अभियान में जुट गई हैं। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ‘वैग्नर ग्रुप’ के प्रमुख रूसी शहर में कैसे दाखिल हुए और उनके साथ कितने लड़ाके हैं।

प्रीगोझिन ने कहा कि उनका लक्ष्य रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू को दंडित करना है, क्योंकि रूसी सरकार के सैन्य बलों ने यूक्रेन में वैग्नर के शिविरों पर रॉकेट, हेलीकॉप्टर और तोपों से निशाना बनाने का आदेश दिया। प्रीगोझिन ने कहा कि रक्षा मंत्री शोइगू से मुलाकात के बाद सेना प्रमुख जनरल वेलेरी गेरासिमोव ने यह आदेश दिया था।

हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने ‘वैग्नर ग्रुप’ के शिविरों पर हमले से इनकार किया।

प्रीगोझिन ने यह भी दावा किया कि उनकी सेना ने एक रूसी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराया, जिसने नागरिकों के एक काफिले पर गोलीबारी की थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रीगोझिन (62) का रूसी नेता के साथ लंबे समय से संबंध है और उन्होंने ‘क्रेमलिन’ में खानपान का अनुबंध हासिल किया था, जिससे उन्हें ‘‘पुतिन का शेफ’’ कहा जाने लगा।

अमेरिका में प्रीगोझिन तब सुर्खियों में आए जब उन पर और कुछ अन्य रूसी नागरिकों पर डोनाल्ड ट्रम्प की 2016 के राष्ट्रपति चुनाव की जीत से पहले गड़बड़ी पैदा करने के उद्देश्य से एक गुप्त सोशल मीडिया अभियान चलाने का आरोप लगाया गया।

प्रीगोझिन ने भाड़े के लड़ाकों का समूह ‘‘वैग्नर ग्रुप’ का गठन किया। उन्होंने लीबिया, सीरिया, कई अफ्रीकी देशों और यूक्रेन में अपने लड़ाकों को लड़ाई में शामिल होने के लिए भेजा।

पुतिन के संबोधन के बाद अधिकारियों ने प्रीगोझिन से ‘क्रेमलिन’ के प्रति अपनी निष्ठा दोहराने का आह्वान किया और पीछे हटने का आग्रह किया।

रूस की संसद के निचले सदन के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोदिन ने कहा कि सांसद ‘‘सुरक्षा बलों की एकजुटता के लिए खड़े हैं’’ और पुतिन का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘वैग्नर लड़ाकों को सही विकल्प चुनना होगा। अपने लोगों का साथ देते हुए कानून के पक्ष में रहना होगा, मातृभूमि की सुरक्षा और भविष्य की रक्षा के लिए, कमांडर-इन-चीफ के आदेशों का पालन करना होगा।’’

इस बीच, चेचन्या क्षेत्र के नेता रमजान कादिरोव ने पुतिन के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। कादिरोव ने सेना की आलोचना में प्रीगोझिन का पक्ष लिया था। कादिरोव ने कहा, ‘‘हमारे पास लोगों द्वारा चुना गया प्रमुख कमांडर है, जो स्थिति को किसी भी रणनीतिकार और व्यवसायी से बेहतर जानता है। विद्रोह को कुचलने की जरूरत है।’’

प्रीगोझिन द्वारा बगावत के एलान का क्या असर होगा, फिलहाल यह साफ नहीं है, लेकिन इसकी वजह से यूक्रेन में रूस का अभियान और प्रभावित होने की आशंका है। ‘वैग्नर ग्रुप’ के लड़ाकों ने यूक्रेन युद्ध में अहम भूमिका निभाते हुए बखमूत शहर पर कब्जा करने में कामयाबी हासिल की थी, जो लंबी और भीषण लड़ाई का गवाह रहा था। इससे संयुक्त मोर्चा कायम रखने की पुतिन की क्षमता पर भी सवाल उठेंगे।

अपने टेलीग्राम चैनल पर जेलेंस्की ने विद्रोह का उल्लेख किया और कहा, ‘‘जो कोई भी बुराई का रास्ता चुनता है, वह खुद को नष्ट कर लेता है।’’

जेलेंस्की ने कहा, ‘‘लंबे समय तक, रूस ने अपनी कमजोरी और अपनी सरकार की मूर्खता को छुपाने के लिए दुष्प्रप्रचार का सहारा लिया। अब इतनी अराजकता है कि कोई भी झूठ इसे छिपा नहीं सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘रूस की कमजोरी स्पष्ट है। रूस जितनी देर तक अपनी सेना और भाड़े के सैनिकों को हमारी जमीन पर रखेगा, बाद में उसे उतनी ही अधिक अराजकता, पीड़ा और समस्याएं होंगी।’’

प्रीगोझिन का रक्षा मंत्रालय के साथ विवाद वर्षों पुराना है। उन्होंने उस शर्त को मानने से इनकार कर दिया कि उनकी सेनाएं एक जुलाई से पहले मंत्रालय के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करें। प्रीगोझिन ने शुक्रवार को कहा कि वह समझौते के लिए तैयार थे लेकिन ‘‘उन्होंने हमें धोखा दिया है।’’

पश्चिमी देश घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जी-7 के अन्य देशों में अपने समकक्षों और यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रतिनिधि के साथ बात की। विदेश मंत्री के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ब्लिंकन ने दोहराया कि यूक्रेन के लिए अमेरिका का समर्थन नहीं बदलेगा।’’

रूस की सीमा से लगे दो नाटो देशों लातविया और एस्टोनिया ने कहा कि वे अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा रहे हैं। ‘क्रेमलिन’ ने कहा कि पुतिन ने घटनाओं के बारे में तुर्किये, बेलारूस, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के नेताओं से फोन पर बात की।

ऐसी अटकलें थीं कि पुतिन ने मॉस्को छोड़ दिया है, लेकिन ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसका खंडन किया।

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