पेरिस, 12 जून (एपी) फ्रांस में रविवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है और दोपहर तक 4 करोड़ 87 लाख मतदाताओं में से केवल 18 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चुनाव को बहुमत की आस लगाए बैठे राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के लिए एक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। मैक्रों के गठबंधन को वामपंथी गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है।
नेशनल असेंबली की 577 सीटों के लिए हो रहे पहले चरण के चुनाव में 6 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चरण में सबसे अधिक मत हासिल करने वाले उम्मीदवार 19 जून को होने वाले दूसरे दौर में पहुंच जाएंगे, जिसमें हार-जीत का फैसला होगा।
मई में मैक्रों के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद उनका मध्यमार्गी गठबंधन इस चुनाव नें स्पष्ट बहुमत हासिल करना चाहता है, ताकि वह अपने चुनावी वादों को पूरा कर सके। इन चुनावी वादों में करों में कटौती और सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करना शामिल है।
हालांकि, चुनाव पूर्व सर्वेक्षण बताते हैं कि मैक्रों और उनके सहयोगियों को बहुमत हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
ताजा सर्वे के अनुसार, इस चुनाव में धुर वामपंथी नेता ज्यां-लुस मेलेंकोन के नेतृत्व वाले गठबंधन के 200 से अधिक सीटें जीतने का अनुमान है। हालांकि, उसके भी बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रहने की संभावना है। वहीं, मैक्रों और उनके सहयोगियों को 260 से 320 सीटों पर जीत मिल सकती है।
मेलेंकोन ने मतदाताओं से अपने गठबंधन को बहुमत दिलाने का आग्रह किया है। उन्हें वैश्वीकरण के विरोधी, फ्रांस को नाटो से बाहर निकालने के हिमायती और यूरोपीय संघ के नियमों की "अवज्ञा" का आह्वान करने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है।
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