नयी दिल्ली, 27 जनवरी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विरोध पर सवाल उठाते हुए सोमवार को कहा कि यह केवल समय की बात है जब पूरा देश एक समान संहिता अपना लेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे लैंगिक समानता आएगी।
राज्यसभा इंटर्नशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों के एक नए समूह को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा कि यह “बहुत शुभ संकेत” है कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता को वास्तविकता बना दिया है।
उत्तराखंड सोमवार को समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। इसके साथ ही सत्तारूढ़ भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले की गई एक बड़ी प्रतिबद्धता को पूरा किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में यह प्रावधान है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा, “... मुझे यकीन है कि यह केवल समय की बात है जब पूरा देश एक समान कानून अपना लेगा।”
यूसीसी के विरोध का उल्लेख करते हुए राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने कहा, “मैं कहूंगा कि कुछ लोग अज्ञानता के कारण इसकी आलोचना कर रहे हैं। हम किसी ऐसी चीज की आलोचना कैसे कर सकते हैं जो संविधान में दी गई है?... ऐसा कुछ जिससे लैंगिक समानता आएगी। इसका विरोध क्यों?”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, धनखड़ का मानना था कि राजनीति ने लोगों के दिमाग में “इतनी गहरी जड़ें” जमा ली हैं कि यह “जहर” बन गई है।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “राजनीतिक लाभ के लिए लोग राष्ट्रवाद को त्यागने में एक पल के लिए भी नहीं हिचकिचाते, बिना किसी चिंता के। कोई भी समान नागरिक संहिता लागू करने का विरोध कैसे कर सकता है?”
संक्षेप में, समान नागरिक संहिता का अर्थ है सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना जो धर्म पर आधारित न हो। व्यक्तिगत कानून और विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों के एक समान संहिता के अंतर्गत आने की संभावना है।
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