देश की खबरें | वडोदरा नाव हादसा : उच्च न्यायालय ने दो पूर्व नगर निगम आयुक्तों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया

अहमदाबाद, नौ जुलाई गुजरात उच्च न्यायालय ने वडोदरा में नाव पलटने की घटना के सिलसिले में नगर निगम के दो पूर्व आयुक्तों के खिलाफ राज्य सरकार से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है।

अदालत ने कहा कि वे कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के दोषी हैं।

वडोदरा शहर की हरनी झील में 18 जनवरी 2024 को एक नाव पलट गई थी। इस घटना में, पिकनिक पर गए 12 स्कूली बच्चों और एक निजी स्कूल के दो शिक्षकों की मौत हो गई।

इस त्रासदी के संबंध में, स्वत: संज्ञान वाली एक जनहित याचिका पर पिछले सप्ताह अपने आदेश में मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि कोटिया प्रोजेक्ट्स को ‘‘प्रक्रिया में बोली लगाने के लिए एक पात्र कंपनी नहीं कहा जा सकता और ऐसे में इसके चयन का सवाल ही नहीं उठता है।’’

यह कंपनी उस वक्त झील का प्रबंधन करती थी। अदालत का आदेश मंगलवार को उपलब्ध हुआ।

सरकारी अधिकारियों की ओर से हुई चूक की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित तथ्यान्वेषी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए न्यायाधीशों ने एच एस पटेल और विनोद राव के बारे में प्रतिकूल टिप्पणियां पारित कीं, जो घटना के समय नगर आयुक्त थे।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि उक्त अवधि के दौरान पदस्थ दोनों नगर आयुक्त कर्तव्य की उपेक्षा करने और अपने पद के दुरुपयोग के दोषी हैं। किसी भी स्थिति में मेसर्स कोटिया प्रोजेक्ट्स को इस प्रक्रिया में बोली लगाने का पात्र नहीं कहा जा सकता, इसलिए इसके चयन का सवाल ही नहीं उठता।’’

अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि समिति ‘कोटिया प्रोजेक्ट्स’ को ठेका देने के मामले में बरती गई अवैधता को दबाने की कोशिश कर रही है।

इसने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए और अदालत को परिणाम से अवगत कराया जाना चाहिए।

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