नैनीताल, चार नवंबर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि वह पिथौरागढ़ जिले के मदाधुरा स्थित नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान के निर्माण पर 14 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद उसके लिए नयी जगह क्यों तलाश रही है।
राज्य सरकार ने एक भूवैज्ञानिक रिपोर्ट में क्षेत्र में जमीन धंसने का खतरा होने का उल्लेख किये जाने के बाद संस्थान को कहीं और स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज तिवारी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने शुक्रवार को मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव से 10 दिन में इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा।
पीठ ने कहा, "परियोजना पर पहले ही खर्च की जा चुकी राशि का क्या?"
इंजीनियरिंग संस्थान के निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दान में दी थी।
जनहित याचिका में कहा गया है कि इतनी अधिक रकम खर्च करने के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित करना उचित नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश निर्माण निगम (यूपीसीसी) इस परियोजना पर पहले ही 14 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। भूवैज्ञानिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेज भवन के निर्माण से पहले यूपीसीसी को एक सहायक दीवार (मिट्टी को किनारे धंसने से रोकने के लिए) बनानी थी, लेकिन उसने इस आवश्यकता को नजरअंदाज कर दिया।
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