महोबा/लखनऊ (उप्र), 15 अक्टूबर महोबा जिले में एक क्रशर व्यवसायी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार तथा दो बर्खास्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ बृहस्पतिवार को गैर जमानती वारंट जारी किया गया।
लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण अदालत के विशेष न्यायाधीश हरेन्द्र बहादुर सिंह ने महोबा के कबरई थाने में दर्ज मुकदमे के मामले में इस समय निलम्बित चल रहे तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार तथा बर्खास्त दारोगा देवेन्द्र कुमार शुक्ला और बर्खास्त सिपाही अरुण कुमार यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
यह आदेश विवेचनाधिकारी कालू सिंह की अर्जी पर दिया गया है।
चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के. सत्यनारायण ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण अदालत संख्या-नौ के विशेष न्यायाधीश ने पाटीदार, बर्खास्त उपनिरीक्षक (तत्कालीन कबरई थानाध्यक्ष) देवेन्द्र कुमार शुक्ला और बर्खास्त सिपाही (आरक्षी) अरुण कुमार यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है।
उन्होंने बताया कि "फरार अभियुक्तों के खिलाफ महोबा जिले के कबरई थाने में मुकदमा अपराध संख्या-234/2020, धारा-306, 387, 120बी, 504, 506 भादंस व 7/7ए/8/12/13 का अभियोग पंजीकृत है।"
अब पाटीदार तथा दो बर्खास्त पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की सम्भावना बढ़ गयी है।
गौरतलब है कि सात और आठ सितंबर को महोबा के एसपी मणिलाल पाटीदार के खिलाफ रिश्वत मांगने, झूठे मुकदमों में फंसाने और अपनी हत्या की आशंका व्यक्त करने संबंधित वीडियो वायरल करने के कुछ घंटे बाद क्रशर व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी अपनी कार में गोली लगने से घायल मिले थे।
वीडियो वायरल होने और व्यवसायी के घायल होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस अधीक्षक पाटीदार को निलंबित कर दिया था। इंद्रकांत के बड़े भाई रविकांत की तहरीर पर 11 सितम्बर को पाटीदार, कबरई के बर्खास्त थानाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार शुक्ला और दो अन्य विस्फोटक सामाग्री व्यवसायी सुरेश सोनी तथा ब्रह्मदत्त (दोनों व्यवसायी जेल में बंद हैं) के खिलाफ जबरन धन वसूली (386), हत्या का प्रयास (307), साजिश रचना (120बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-7/8 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
पिछली 13 सितंबर को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में इलाज के दौरान घायल व्यवसायी इन्द्रकांत की मौत होने के बाद 15 सितंबर को शासन के आदेश पर पुलिस महानिदेशक ने वाराणसी के आईजी विजय सिंह मीणा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की जांच में मामला आत्महत्या के लिए बाध्य करने की भादंसं की धारा-306 में बदल गया।
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