बहराइच, 13 नवंबर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) में हाल ही में सिविल सेवा के एक अभ्यर्थी की इलाज के बाद मौत के मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गयी और अस्पताल के अधीक्षक को पद से हटा दिया गया। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि परिजनों द्वारा इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाये जाने के बाद जिलाधिकारी मोनिका रानी ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया था।
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मृतक के परिजनों से बृहस्पतिवार को मुलाकात करेगा।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पयागपुर नगर पंचायत के रहने वाले प्रियांशु उर्फ अंकित जायसवाल (21) आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
सूत्रों ने बताया कि अंकित ने प्री परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और वह दीपावली पर अपने घर आया था।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान तबियत खराब होने पर परिवार के लोग अंकित को पयागपुर स्थित सामुदायिक केन्द्र ले गये, जहां इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी।
सूत्रों ने बताया कि परिजनों ने स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक पर गलत इलाज के कारण युवक की मौत होने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लापरवाह चिकित्सक तथा स्वास्थ्य केन्द्र कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जिलाधिकारी मोनिका रानी ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए और संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक को हटाकर जिला मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया।
नगर मजिस्ट्रेट शालिनी प्रभाकर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल इस मामले की जांच कर रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने मंगलवार को ‘पीटीआई-’ को बताया था कि करीब 20-22 वर्षीय प्रियांशु उर्फ अंकित जायसवाल को तबीयत खराब होने पर गत दो नवम्बर को पयागपुर सीएचसी में लाया गया था।
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