देश की खबरें | स्वच्छ ईंधन का उपयोग करने पर पीएम2.5 से होने वाली समय पूर्व मौतों की संख्या घट सकती है:अध्ययन

नयी दिल्ली, नौ अगस्त प्रदूषणकारी ठोस ईंधन की जगह स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ाना बंद स्थानों पर ‘पीएम2.5’ प्रदूषकों के सकेंद्रण से पीड़ित होने में कमी ला सकता है और इन प्रदूषकों से होने वाली समय पूर्व मौत के आंकड़े घट सकते हैं। ‘द लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है।

पीएम2.5 प्रदूषक हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास के कण होते हैं।

अध्ययन में, 2020 के लिए घरेलू वायु प्रदूषण (एचएपी) का आकलन करने के लिए अपनाई गई पद्धति का उपयोग वैश्विक स्तर पर एचएपी-पीएम2.5 का अनुमान लगाने के लिए किया गया। इसमें 62 देशों में लोगों के इससे पीड़ित होने और 69 देशों में बंद स्थानों पर इसके सकेंद्रण को शामिल किया गया।

शोधार्थियों ने प्रति एक लाख की आबादी पर इससे संबद्ध मृत्यु दर का अनुमान लगाया।

राष्ट्रीय स्तर पर 2020 में, ठोस ईंधन का उपयोग करने के दौरान 24 घंटे में एक व्यक्ति के लिए इसकी मात्रा 151 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। हालांकि, स्वच्छ ईंधन के उपयोग के दौरान यह मात्रा 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। इससे होने वाली मृत्यु की दर, ठोस ईंधन के मामले में 78 और स्वच्छ ईंधन के मामले में 62 दर्ज की गई।

ठोस ईंधन का उपयोग करने के दौरान बंद स्थानों पर पीएम2.5 का सकेंद्रण 412 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया। हालांकि, स्वच्छ ईंधन का उपयोग करने के दौरान इसका सकेंद्रण मूल स्तर से घट कर एक तिहाई, 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। समय से पहले होने वाली मृत्यु की दर 78 (ठोस ईंधन) से घटकर 59 (स्वच्छ ईंधन) हो गई।

अध्ययन में यह प्रदर्शित हुआ है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में पारंपरिक चूल्हों से निकलने वाले प्रदूषक कण अत्याधुनिक चूल्हों की तुलना में अधिक थे।

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