विदेश की खबरें | उत्तर कोरिया के खिलाफ ताकत दिखाते हुए अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका में परमाणु शक्ति संपन्न पनडुब्बी भेजी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपतियों ने उत्तर कोरिया की ओर से बढ़ते परमाणु खतरे के जवाब में अप्रैल में अनेक समझौते किये थे जिनमें से एक दक्षिण कोरिया में अमेरिका की परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जा सकने वाली पनडुब्बियों की समय-समय पर आमद है।

उन्होंने एक द्विपक्षीय परमाणु परामर्श समूह स्थापित करने और सैन्याभ्यास बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ओहायो-श्रेणी की पनडुब्बी ‘यूएसएस केंचुकी’ मंगलवार दोपहर में दक्षिण कोरिया के बुसान बंदरगाह पर पहुंची। उसने कहा कि यह 1980 के दशक के बाद से अमेरिका की किसी परमाणु क्षमता संपन्न पनडुब्बी की पहली दक्षिण कोरिया यात्रा है।

रक्षा मंत्री ली जोंग-सुप ने पनडुब्बी के आने को अमेरिका की प्रतिरोधक प्रतिबद्धता को लेकर उसका संकल्प बताया।

उन्होंने कहा कि पनडुब्बियों का आना उत्तर कोरिया के खिलाफ सहयोगी देशों की क्षमता और रुख को दिखाता है।

शीत युद्ध के दौरान 1970 के दशक के अंत में अमेरिकी परमाणु शक्ति संपन्न बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों ने दक्षिण कोरिया के लगातार कई दौरे किये थे और फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुसार कई बार एक महीने में दो से तीन बार ये दौरे होते थे।

इसी बीच दक्षिण कोरिया और अमेरिका के एक द्विपक्षीय परामर्श समूह ने मंगलवार को सियोल में मुलाकात की और उत्तर कोरिया के उभरते परमाणु खतरों के खिलाफ अपने देशों की निरोधक क्षमताओं को मजबूत करने पर चर्चा की।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक यिओल की अप्रैल में हुई मुलाकात के दौरान समझौतों के तहत परमाणु परामर्श समूह बनाया गया था।

दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा कि इस समूह का काम परमाणु और रणनीतिक हथियारों के परिचालन की योजना पर सूचना साझा करना और संयुक्त अभियान पर चर्चा करना है।

अमेरिका अपने परमाणु हथियारों पर परिचालन नियंत्रण कायम रखेगा और उसके अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल में समूह की स्थापना और अन्य कदमों का उद्देश्य उत्तर कोरिया की उकसावे वाली कार्रवाई को लेकर दक्षिण कोरिया की चिंताओं को दूर करना है।

यून ने कैबिनेट काउंसिल की बैठक में कहा कि समूह की उद्घाटन बैठक कोरिया-अमेरिका की ओर से शक्तिशाली और प्रभावी निरोधक प्रणाली स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत होगी।

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