पापुआ न्यू गिनी ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से अहम देश है। यहां द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भीषण लड़ाइयां हुई थीं। करीब एक करोड़ की आबादी वाला यह देश सर्वाधिक जनसंख्या वाला हिंद प्रशांत देश है।
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नया समझौता सुरक्षा सहयोग में सुधार करने, पापुआ न्यू गिनी के रक्षा बल की क्षमता और क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने में मदद करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करेगा। विभाग ने कहा कि इस समझौते को कुछ महीनों के बाद सार्वजनिक किया जाएगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पत्रकारों से कहा,“भविष्य को आकार देने की कोशिश के लिए हम जो काम एक साथ कर रहे हैं, वह इससे अधिक अहम नहीं हो सकता, इससे अधिक सामयिक नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा, “ हम हिंद प्रशांत में गहराई से जुड़े हुए हैं, क्योंकि हमारी पृथ्वी का भविष्य यहां लिखा जा रहा है। पापुआ न्यू गिनी उस भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है।”
पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने कहा कि यह समझौता पारस्परिक रूप से लाभकारी है और दुनिया के इस हिस्से में मजबूत अर्थव्यवस्था बनने में “ हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा” करता है।
बहरहाल, इस समझौते के खिलाफ देश के दूसरे सबसे बड़े शहर ले में छात्रों ने प्रदर्शन किए। इसके अलावा प्रशांत क्षेत्र में कई लोग इस क्षेत्र के बढ़ते सैन्यीकरण को लेकर चिंतित हैं।
पिछले साल सोलोमन आइलैंड्स ने चीन के साथ सुरक्षा समझौता किया था। इस कदम से पूरे प्रशांत क्षेत्र में चिंता व्यक्त की गई थी। अमेरिका ने प्रशांत क्षेत्र में अपनी तवज्जो बढ़ा दी है और सोलोमन आइलैंड्स और टोंगा में दूतावास खोले हैं।
राष्ट्रपति जो बाइडन ने पापुआ न्यू गिनी की अपनी यात्रा रद्द कर दी थी। अगर वह यात्रा पर आते तो यहां आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति होते। उनके स्थान पर विदेश मंत्री ब्लिंकन सोमवार को यहां पहुंचे।
अमेरिकी विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे वक्त हुई है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पापुआ न्यू गिनी आए थे। उन्होंने सहयोग के बेहतर तरीकों पर चर्चा करने के लिए प्रशांत द्वीप के नेताओं की बैठक की मेज़बानी की थी।
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