वाराणसी, चार मार्च भाजपा गठबंधन और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी दलों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए अपने मूल मतदाताओं को जुटाने का काम आसान नहीं है।
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और निषाद दलों के नेतृत्व में अपना दल (सोनेलाल) की ताकत की भी परीक्षा वाराणसी में होगी। वाराणसी में अंतिम चरण में सात मार्च को मतदान होना है।
इसी तरह अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (कामेरवादी) और ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए विशेष रूप से वाराणसी में उपयोगिता की परीक्षा होगी।
पार्टियों के सूत्रों का कहना है कि पटेल समुदाय के दो लाख वोट स्थानीय रूप से ओबीसी कुर्मी के रूप में जाने जाते हैं, जिसके लिए मां-बेटी के नेतृत्व वाली अपना दल (एस) और अपना दल (के) बीच रस्साकशी है, ओबीसी राजभर के एक लाख से अधिक वोट इस वाराणसी क्षेत्र में परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी चार और पांच मार्च को अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में दो दिनों के लिए चुनावी युद्ध का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, वहीं विपक्षी दल भी अपने-अपने सहयोगियों के पक्ष में प्रचार में लगे हैं।
वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट पर दोनो अपना दल सीधे एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं ।
अनुप्रिया के नेतृत्व वाली पार्टी ने सुनील को अपनी मां के नेतृत्व वाले संगठन के अभय से लड़ने के लिए मैदान में उतारा है। अपना दल (के) भी पिंडारा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के अवधेश सिंह और कांग्रेस अजय राय को टक्कर देने के लिए चुनाव मैदान में है। इसी तरह पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर को भगवा पार्टी के उम्मीदवारों को सीधे टक्कर देने के लिए अजगोड़ा और शिवपुर सीटें दी गई हैं।
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